जमुई जिले में सरकारी लापरवाही की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है, जहां 19 लाख की आबादी के बावजूद एकमात्र पोस्टमार्टम हाउस पिछले 11 सालों से बंद पड़ा है। जिला मुख्यालय से करीब 2 किलोमीटर दूर किउल नदी किनारे त्रिपुरारी घाट पर साल 2015 में इस मोर्चरी हाउस का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज तक यह चालू नहीं हो सका।
श्मशान घाट के पास इसे बनाने का उद्देश्य था कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शहर से बाहर आसानी से हो सके और अज्ञात शवों को 72 घंटे तक सुरक्षित रखने की सुविधा मिले। साथ ही पहचान न होने पर शवों का अंतिम संस्कार भी पास के श्मशान में कराया जा सके। लेकिन ये सभी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गईं।
देखरेख के अभाव में भवन अब जर्जर हो चुका है। आसपास झाड़-झंखाड़ उग आए हैं और यह जगह असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गई है। स्थानीय मजदूरों का कहना है कि उन्होंने कभी यहां किसी शव का पोस्टमार्टम होते नहीं देखा। दिन में भी लोग यहां आने से कतराते हैं, क्योंकि न सड़क है, न बिजली और न ही सुरक्षा।
पहले शहर के बीच पोस्टमार्टम हाउस था, लेकिन आबादी बढ़ने के कारण उसे हटाकर यहां नया भवन बनाया गया। बावजूद इसके, संसाधनों की कमी के चलते यह शुरू ही नहीं हो पाया। बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी नहीं हैं।
सिविल सर्जन अशोक कुमार सिंह ने भी माना कि पोस्टमार्टम हाउस फिलहाल चालू हालत में नहीं है। उन्होंने बताया कि अप्रोच रोड और बिजली की समस्या जल्द दूर करने के लिए विभाग को लिखा गया है। उनका कहना है कि रास्ता बनते ही इसे शुरू कर दिया जाएगा।
फिलहाल जमुई सदर अस्पताल के जर्जर भवन में पोस्टमार्टम किया जा रहा है, जहां शवों की लंबी कतार लगती है। खुले में शव पड़े रहने से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। त्रिपुरारी घाट का यह मोर्चरी हाउस अब प्रशासनिक दावों की हकीकत बयां करता खंडहर बन चुका है, जिसे जल्द चालू करने की मांग तेज हो रही है।
