मुजफ्फरपुर की वंदना शर्मा ने एक ऐसा देसी ‘बायोसैंड वाटर प्यूरीफायर’ तैयार किया है, जो कम लागत में लंबे समय तक शुद्ध पानी उपलब्ध कराने में सक्षम है। महज ₹2000 की कीमत वाला यह उपकरण करीब 30 वर्षों तक काम कर सकता है और इसे चलाने के लिए बिजली की जरूरत नहीं होती। यही वजह है कि यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है, जहां साफ पानी और बिजली दोनों की कमी आम है।

वंदना शर्मा ने इस तकनीक की ट्रेनिंग उत्तराखंड से ली और वहां सराहना भी हासिल की। इसके बाद उन्होंने मुजफ्फरपुर के फकीरा चौक से इस पहल की शुरुआत की। अब तक 350 से अधिक घरों में यह प्यूरीफायर लगाया जा चुका है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

इस प्यूरीफायर की संरचना बेहद सरल लेकिन प्रभावी है। इसे बनाने के लिए लोहे का फ्रेम तैयार किया जाता है, जिसमें नीचे मोटी गिट्टी, फिर छोटी गिट्टी, उसके ऊपर बालू (रेत) की परत डाली जाती है। ऊपर से डाला गया पानी इन परतों से धीरे-धीरे छनकर नीचे आता है और प्राकृतिक रूप से शुद्ध हो जाता है। साफ पानी एक पाइप के जरिए बाहर निकलता है।

इसकी क्षमता भी संतोषजनक है। यह प्रति मिनट लगभग एक लीटर पानी शुद्ध करता है और एक दिन में करीब 80–85 लीटर पानी साफ कर सकता है, जो एक परिवार के लिए पर्याप्त है। एक बार में लगभग 14 लीटर पानी डाला जा सकता है, जो आधे घंटे में शुद्ध हो जाता है। हालांकि, यदि इसे 30 दिन तक इस्तेमाल न किया जाए, तो अंदर की बालू बदलनी पड़ती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित पानी से डायरिया, हैजा, टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में यह कम लागत वाला समाधान ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान साबित हो रहा है। वंदना शर्मा की यह पहल दिखाती है कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

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