बिहार के सहरसा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां महज एक थर्मामीटर की खरीद के लिए 1 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक का टेंडर जारी कर दिया गया। इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब इसकी जांच भी शुरू कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, यह टेंडर सिविल सर्जन कार्यालय, सहरसा के माध्यम से निकाला गया था। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए जेम पोर्टल (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) का उपयोग किया गया, लेकिन इसके बावजूद पूरी प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि 31 जनवरी 2026 को टेंडर की अंतिम तिथि तय की गई थी और उसी दिन इसे खोला भी गया। इस टेंडर में कई कंपनियों ने भाग लिया, जिसमें से एल-वन यानी सबसे कम दर वाली कंपनी ‘हिमानी फार्मा’ को 1 करोड़ 33 लाख 78 हजार 461 रुपये का ऑर्डर दे दिया गया।
मामले के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद ने बताया कि थर्मामीटर की खरीद के लिए टेंडर निकाला गया था, लेकिन गड़बड़ी की आशंका के बाद फिलहाल टेंडर को रद्द कर दिया गया है।
वहीं, इस पूरे मामले में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि जब जेम पोर्टल जैसी पारदर्शी प्रणाली मौजूद है, तो इतनी बड़ी अनियमितता कैसे हुई। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि इसमें अधिकारियों और संबंधित कंपनियों की मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है और जिम्मेदारों की पहचान की जा रही है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सच सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
