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गया का ‘तरबूज गांव’ मौसम की मार से बेहाल, किसानों पर संकट

गया जिले के गुरुआ प्रखंड का लालगढ़ गांव बिहार में ‘तरबूज गांव’ के नाम से मशहूर है. यहां उगने वाले मीठे, लाल और बड़े आकार के तरबूज बिहार ही नहीं, झारखंड समेत कई राज्यों में भेजे जाते हैं. लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. गांव में खुशहाली की जगह मायूसी दिखाई दे रही है.

मोरहर नदी किनारे बसे लालगढ़ गांव में करीब 200 से 300 सालों से तरबूज की खेती होती आ रही है. गांव के लगभग 150 परिवार इसी खेती पर निर्भर हैं. किसानों का कहना है कि यह सिर्फ फसल नहीं, बल्कि पूरे साल की आजीविका का आधार है. आमतौर पर एक एकड़ में करीब 15 हजार किलो तक तरबूज की उपज होती है और बाजार में अच्छे दाम मिलने पर किसान 2 से 3 लाख रुपये तक कमा लेते हैं. कई किसान 2 से 3 एकड़ में खेती कर सालाना लाखों की आमदनी करते रहे हैं.

लेकिन इस बार लगातार बारिश और ठंडे मौसम ने पूरी खेती चौपट कर दी. किसानों के मुताबिक तरबूज की फसल के लिए तेज गर्मी और पछुआ हवा जरूरी होती है, लेकिन इस सीजन में हर दो-तीन दिन पर बारिश होती रही. इसका असर यह हुआ कि खेतों में बड़े तरबूज की जगह सिर्फ 1 से 2 किलो तक के छोटे फल निकल रहे हैं. कई जगह फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है.

किसान संजय साव बताते हैं कि पहले 8 से 10 किलो तक के बड़े तरबूज निकलते थे, लेकिन इस बार हालत बेहद खराब है. वहीं किसान नागेश्वर सिंह कहते हैं कि फसल की स्थिति देखकर रोना आ रहा है. खरीदार भी नहीं पहुंच रहे, जिससे बची हुई फसल बेचना भी मुश्किल हो गया है.

किसान नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि उन्होंने 3 एकड़ में करीब 45 हजार रुपये खर्च कर खेती की थी और 5 लाख रुपये तक कमाई की उम्मीद थी, लेकिन अब पूंजी निकलना भी मुश्किल लग रहा है. किसानों को डर है कि अगर मौसम नहीं सुधरा तो लालगढ़ के कई परिवार आर्थिक संकट में फंस जाएंगे।

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