सहरसा: जिले में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध जलकुंभी के उपयोग को लेकर आज जिलाधिकारी सहरसा के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जलकुंभी जैसे अपशिष्ट संसाधन को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि यदि सुनियोजित ढंग से कार्य किया जाए तो जलकुंभी से हस्तशिल्प वस्तुएं, सजावटी सामग्री तथा विभिन्न ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

 

बैठक में एमएसएमई मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग विभाग (एमएसएमई–रैंप) तथा North Eastern Development Finance Corporation Limited (NEDFi) के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि मंत्रालय एवं कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के सहयोग से सामान्य सुविधा केंद्र (CFC) की स्थापना की जा सकती है। इस केंद्र के माध्यम से इच्छुक किसानों, स्वयं सहायता समूहों तथा उद्यमियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन से भी जोड़ा जाएगा।

 

प्रतिनिधियों ने बताया कि जलकुंभी का उपयोग कर टोकरी, बैग, मैट, फाइल कवर जैसे हस्तशिल्प उत्पादों के साथ-साथ जैविक खाद और अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा सकती हैं। इससे एक ओर जलाशयों की सफाई में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर किसानों और ग्रामीण युवाओं को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा।

 

जिलाधिकारी महोदय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जलकुंभी को समस्या नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर प्रस्ताव को शीघ्र मूर्त रूप देने का निर्देश दिया और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

 

बैठक में यह भी कहा गया कि इस पहल से सहरसा जिले को एक नई पहचान मिल सकती है और स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकते हैं।

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