पटना से सहरसा आ रही राज्यरानी एक्सप्रेस में इन दिनों यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। हालत यह है कि ट्रेन के स्लीपर से लेकर जनरल कोच तक में पैर रखने की जगह नहीं बचती। यात्री दरवाजों पर लटककर और सीटों के नीचे बैठकर सफर करने को मजबूर हैं।
इस रूट पर ट्रेनों की संख्या पहले से ही सीमित है। ऐसे में रोजाना हजारों लोगों को नौकरी, पढ़ाई, इलाज और पारिवारिक कारणों से पटना और सहरसा के बीच यात्रा करनी पड़ती है। गर्मी का मौसम नजदीक आते ही यात्रियों की संख्या और बढ़ने लगी है। स्कूल-कॉलेज की छुट्टियां, शादियों का सीजन और बाहर काम करने वाले लोगों की घर वापसी—इन सब कारणों से ट्रेनों में दबाव लगातार बढ़ रहा है।
यात्रियों का कहना है कि कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। वेटिंग लिस्ट लंबी रहती है और कई बार तत्काल टिकट भी उपलब्ध नहीं हो पाता। मजबूरी में लोग जनरल डिब्बे में सफर करते हैं, जहां हालात और भी बदतर हैं। भीड़ के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खास दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस महत्वपूर्ण रूट पर ट्रेनों की संख्या जरूरत के हिसाब से बहुत कम है। कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लाखों लोग पटना पर निर्भर हैं, लेकिन परिवहन सुविधा पर्याप्त नहीं है। यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि पटना–सहरसा रूट पर अतिरिक्त ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जाए या फिर मौजूदा ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े जाएं।
यदि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई तो गर्मी के चरम पर हालात और बिगड़ सकते हैं। यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि प्रशासन यात्रियों की इस जायज मांग पर कब तक ध्यान देता है।
