भागलपुर जिले के नाथनगर प्रखंड अंतर्गत गोसाईंदासपुर पंचायत के मथुरापुर स्थित महर्षि मेही आश्रम में मंगलवार को दो दिवसीय पंचायत स्तरीय संतमत सत्संग के 13वें वार्षिक अधिवेशन का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत और ग्रामीण शामिल हुए। आश्रम परिसर पूरे दिन भक्ति और अध्यात्म के वातावरण में सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक प्रवचन के साथ-साथ भजन, स्तुति, विनती, सद्ग्रंथ पाठ और संतों के उपदेश आयोजित किए गए। संतमत सत्संग में शामिल संतों ने महर्षि मेही परमहंस जी के विचारों और संदेशों को जीवन में उतारने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन बड़े भाग्य से प्राप्त होता है और इसका सदुपयोग करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
सत्संग को संबोधित करते हुए कबीर पासवान ने बताया कि कार्यक्रम में परम संतों का प्रेरणादायी प्रवचन हुआ। संतों ने कहा कि मृत्यु संसार का सबसे बड़ा सत्य है, लेकिन इसके बावजूद मनुष्य उससे बचने की इच्छा रखता है। ऐसे में मनुष्य को अपने जीवन में सद्कर्म, सत्कर्म और सद्विचार को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सात्विक जीवन जीने से अच्छे संस्कारों की प्राप्ति होती है और व्यक्ति का जीवन सार्थक बनता है।
संतों ने अपने प्रवचन में यह भी कहा कि प्रत्येक मनुष्य को मनुष्य बनकर जीना चाहिए और समाज में प्रेम, करुणा और भाईचारे की भावना बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति बिना गुरु और उचित मार्गदर्शन के जीवन में विशेषज्ञ या पूर्ण नहीं बन सकता। गुरु के सान्निध्य में रहकर ही आत्मज्ञान और जीवन की सही दिशा प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु ध्यान, भजन और सत्संग में लीन नजर आए। दो दिवसीय इस अधिवेशन का विधिवत समापन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा।
इस मौके पर गोसाईंदासपुर पंचायत की मुखिया पिंकी देवी, सच्चिदानंद शर्मा, पूर्व पंचायत समिति सदस्य तार्केश्वर झा, कबीर पासवान सहित आयोजन समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। साथ ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने कार्यक्रम में भाग लेकर सत्संग का लाभ उठाया।
