बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर पार्टी की गतिविधियों की समीक्षा के उद्देश्य से एक अहम कदम उठाते हुए प्रदेश के छह जिलों में पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के निर्देश पर इस बाबत अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना के अनुसार, औरंगाबाद, गया जी, बक्सर, सारण, नवादा और लखीसराय जिलों में नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक सांगठनिक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे तथा एक सप्ताह के भीतर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
औरंगाबाद जिले की जिम्मेदारी सत्येंद्र सिंह, प्रदुम्न यादव एवं संजय भारती को सौंपी गई है। ये तीनों पर्यवेक्षक जिले के संगठनात्मक ढांचे, पार्टी पदाधिकारियों की सक्रियता, और स्थानीय स्तर पर चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे। गया जी जिले के लिए मनोज कुमार सिंह भारद्वाज, विवेक यादव और सुरेश मुखिया बिंद निषाद को नियुक्त किया गया है, जिनसे यह अपेक्षा की जा रही है कि वे जिले की राजनीतिक स्थिति का आकलन कर पार्टी को मजबूत करने हेतु रणनीतिक सुझाव देंगे।
बक्सर जिले में कैलाश पाल, शाश्वत केदार पाण्डेय और मोहम्मद परवेज अहमद को पर्यवेक्षक बनाया गया है। ये तीनों नेता जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर संगठन की जमीनी हकीकत को सामने लाने का कार्य करेंगे। सारण जिले के लिए सुनील कुमार सिंह, प्रोफेसर सुनील कुमार और राजीव विहंगम की नियुक्ति की गई है। इनसे उम्मीद की जा रही है कि वे संगठन को नए सिरे से सशक्त बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करेंगे।
नवादा जिले में अश्विनी कुमार सिंह, दिलशाद अहमद खान और शिवशंकर प्रसाद को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है। ये सभी नेताओं का दायित्व होगा कि वे जिले की सांगठनिक ताकत का पुनर्मूल्यांकन करें और आवश्यक सुधारों की सिफारिश करें। इसी क्रम में लखीसराय जिले के लिए राजकुमार शर्मा, मिथिलेश शर्मा मधुकर और मोहम्मद तमन्ना की नियुक्ति की गई है। इनकी प्राथमिकता रहेगी कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर संगठन की निष्क्रियता दूर करने के प्रयास करें।
प्रदेश कांग्रेस कमिटी की इस पहल को संगठन के पुनर्गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पर्यवेक्षकों द्वारा सौंपे गए प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित जिलों में संगठनात्मक ढांचे में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। पार्टी का उद्देश्य आगामी चुनावों से पूर्व संगठन को पूरी तरह सक्रिय और प्रभावशाली बनाना है। इससे न केवल कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार होगा, बल्कि जनता के बीच पार्टी की पकड़ भी मजबूत होगी।
