बिहार की ऐतिहासिक शैक्षणिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए 220 एकड़ भूमि हस्तांतरित कर दी गई है। शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भूमि हस्तांतरण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। इसके साथ ही राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में 211 नए डिग्री कॉलेजों के शुभारंभ की भी घोषणा की गई।
विक्रमशिला विश्वविद्यालय प्राचीन भारत के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल रहा है। पाल वंश के शासनकाल में यह विश्वविद्यालय बौद्ध शिक्षा और दर्शन का विश्व प्रसिद्ध केंद्र था, जहां देश-विदेश से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे। अब सरकार इस गौरवशाली विरासत को आधुनिक स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर को आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। यहां अत्याधुनिक पुस्तकालय, शोध केंद्र, छात्रावास और विश्वस्तरीय शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह परियोजना बिहार के छात्रों को राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का अवसर प्रदान करेगी।
कार्यक्रम के दौरान सरकार ने राज्यभर में 211 नए डिग्री कॉलेजों के शुभारंभ की भी जानकारी दी। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने जिले के आसपास ही उच्च शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
सरकार ने कहा कि शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बिहार को ज्ञान और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। विक्रमशिला विश्वविद्यालय का पुनर्निर्माण केवल एक शैक्षणिक परियोजना नहीं, बल्कि बिहार की ऐतिहासिक पहचान और गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है। आने वाले समय में यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा एवं शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की उम्मीद है।





