
सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड के कोसी तटबंध के अंदर बसे नारायणपुर गांव से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां लोगों के घरों, खेतों और पूरे गांव को कोसी नदी के कटाव से बचाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से कटाव निरोधक कार्य कराया गया था। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में भारी अनियमितता और गुणवत्ता की अनदेखी की गई, जिसके कारण यह सुरक्षा व्यवस्था कोसी नदी के हल्के बहाव में ही ध्वस्त होकर नदी में समा गई।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि संवेदक और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कटाव निरोधक संरचना कुछ ही समय में टूट गई।
इस घटना के बाद गांव में भय का माहौल है। लोगों को आशंका है कि यदि कोसी नदी का जलस्तर बढ़ा, तो कटाव सीधे गांव, घरों और कृषि भूमि तक पहुंच सकता है। ऐसे में हजारों लोगों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस निर्माण से उन्हें सुरक्षा मिलने की उम्मीद थी, वही अब उनके लिए चिंता का कारण बन गया है। उनका सवाल है कि जब करोड़ों रुपये की योजना बनाई गई थी, तो उसकी गुणवत्ता की निगरानी किसने की? क्या निर्माण कार्य का तकनीकी निरीक्षण किया गया था? यदि जांच हुई थी, तो इतनी जल्दी पूरी संरचना कैसे ध्वस्त हो गई? और यदि जांच नहीं हुई, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच करवाने तथा दोषी संवेदक और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सरकारी धन की बर्बादी का मामला नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की जान-माल और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर मुद्दा है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है और जिम्मेदार लोगों पर कब कार्रवाई होती है।





