नालंदा में रेलवे परियोजना का विरोध तेज, किसानों का ऐलान- “जान देंगे, जमीन नहीं देंगे”


बिहार के नालंदा जिले में नवादा-पावापुरी प्रस्तावित रेल परियोजना को लेकर किसानों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। गिरियक प्रखंड में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही सैकड़ों किसान सड़क पर उतर आए। ‘रेलवे परियोजना संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा, गिरियक’ के बैनर तले किसानों ने प्रखंड कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

करीब 25.10 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना के लिए लगभग 151 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है। इस परियोजना पर सरकार ने 492 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इससे गिरियक प्रखंड के पुरी, दशरथपुर, सतौआ, मरकट्टा, जलालपुर, नसीरपुर समेत नौ गांवों और नवादा जिले के एक गांव के करीब 1000 से 1200 किसान प्रभावित होंगे।

धरने में शामिल किसानों ने दो टूक कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी उपजाऊ जमीन रेलवे को नहीं देंगे। किसानों का आरोप है कि बिना पर्याप्त सूचना और सहमति के अधिसूचना जारी कर दी गई। सतौआ गांव के किसान और कॉलेज शिक्षक डॉ. परमानंद कुमार ने कहा कि विकास के नाम पर किसानों को उजाड़ा जा रहा है और यह पूरी तरह अलोकतांत्रिक कदम है। उन्होंने चेतावनी दी कि जबरन भूमि अधिग्रहण किया गया तो आंदोलन और तेज होगा।

किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि जब पावापुरी में पहले से रेलवे स्टेशन मौजूद है, जो प्रस्तावित लाइन से महज आठ किलोमीटर दूर है, तो नई रेल लाइन की जरूरत क्या है। किसानों ने नवादा के सांसद विवेक ठाकुर पर भी निशाना साधते हुए परियोजना की समीक्षा की मांग की।

मुआवजे को लेकर भी किसानों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि बाजार मूल्य की तुलना में बहुत कम मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि अधिग्रहित होने वाली जमीन तीन फसली और बेहद उपजाऊ है। किसानों का कहना है कि जमीन चली गई तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

धरने के दौरान किसानों ने अंचलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए परियोजना रद्द करने, पुराने पावापुरी स्टेशन का आधुनिकीकरण करने, बिना सहमति जारी अधिसूचना वापस लेने और उपजाऊ कृषि भूमि की सुरक्षा की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

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