अररिया में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया है। शहर के गोढ़ी चौक के पास वन विभाग कार्यालय के सामने स्थित सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और सड़क किनारे बनी दर्जनों झुग्गी-झोपड़ियों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद कई परिवार बेघर हो गए हैं और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
हालांकि अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई के बीच एक नया विवाद सामने आ गया है। झुग्गियों में बिजली विभाग के मीटर मिलने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन झोपड़ियों में नियमित रूप से बिजली आपूर्ति हो रही थी और विभाग की ओर से मीटर भी लगाए गए थे। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि सरकारी जमीन पर बिना स्वामित्व या वैध दस्तावेज के बिजली कनेक्शन कैसे जारी किए गए।
स्थानीय निवासी मो. एजाज ने बताया कि उनकी बहन की झोपड़ी में बिजली का मीटर लगा हुआ था। उनके अनुसार बिजली कनेक्शन के लिए विभाग में आवेदन किया गया था और मीटर लगवाने में 5 से 6 हजार रुपये खर्च हुए थे। उन्होंने घूस देने से इनकार किया, लेकिन रुपये देकर मीटर लगवाने की बात स्वीकार की। इस बयान के बाद बिजली कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया पर और अधिक सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जमीन सरकारी थी तो कनेक्शन देने से पहले विभागीय अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण क्यों नहीं किया। अब यह मांग उठ रही है कि बिजली मीटर लगाने और कनेक्शन स्वीकृत करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए।
वहीं नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी चंद्रराज प्रकाश ने कहा कि यह कार्रवाई वरीय अधिकारियों के निर्देश पर की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में अतिक्रमण हटाओ अभियान आगे भी जारी रहेगा और जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा मिलेगा, वहां प्रशासन इसी तरह सख्त कार्रवाई करेगा। प्रशासन की इस कार्रवाई के साथ अब बिजली विभाग की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है।






