
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में शिक्षा विभाग के भीतर कथित वेतन घोटाले का मामला सामने आया है। करीब 60 लाख रुपये की सरकारी राशि की अवैध निकासी के आरोप में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने दो कर्मियों के खिलाफ नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है। वहीं, वर्ष 2024 से HRMS पोर्टल के माध्यम से कथित गड़बड़ी होने के दावों ने विभागीय निगरानी और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुसार, आरोपितों में डीपीओ स्थापना कार्यालय में प्रतिनियुक्त एक मदरसा शिक्षक मोहम्मद बेताब और एक कंप्यूटर ऑपरेटर अमन कुमार शामिल हैं। आरोप है कि दोनों ने कथित तौर पर वेतन भुगतान की प्रक्रिया में गड़बड़ी कर सरकारी राशि अपने और परिजनों के खातों में ट्रांसफर कराई। बताया गया है कि मदरसा शिक्षक पर स्वयं और पत्नी के नाम पर, जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर पर अपने और बहन के नाम पर राशि प्राप्त करने का आरोप है। मामले में करीब 60 लाख रुपये की सरकारी राशि के गबन की आशंका जताई गई है।
इस प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वर्ष 2024 से ही कथित तौर पर फर्जी वेतन भुगतान हो रहा था, तो इसकी पहचान समय रहते क्यों नहीं की गई? HRMS पोर्टल के माध्यम से भुगतान की निगरानी कैसे हुई और संबंधित खातों में राशि जाने के बावजूद समीक्षा में गड़बड़ी सामने क्यों नहीं आई? शिक्षकों के वेतन भुगतान में विसंगतियों और बजट में बदलाव की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिला शिक्षा पदाधिकारी से जब डीपीओ स्थापना की संभावित भूमिका को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। हालांकि, केवल दो कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने से पूरे मामले की जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें अन्य किसी की भूमिका थी या नहीं।
फिलहाल पुलिस और विभागीय जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सरकारी राशि की निकासी, भुगतान प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था की जांच अब इस प्रकरण में अहम मानी जा रही है।





