
जमुई। पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से संचालित ‘साइकिल यात्रा एक विचार, जमुई’ अभियान के सदस्यों ने रविवार को अपनी 564वीं यात्रा पूरी की। इस दौरान आठ सदस्यों ने जमुई प्रखंड से साइकिल यात्रा शुरू की और कल्याणपुर, सिकरिया तथा सोनपे होते हुए जमुई प्रखंड के बालाडीह गांव पहुंचे। यात्रा के दौरान सदस्यों ने ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण, मृदा संरक्षण और वृक्षारोपण के महत्व के प्रति जागरूक किया।
यात्रा के दौरान बालाडीह गांव की ग्रामीण एवं जीविका दीदी शिम्पी कुमारी ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में भी साइकिल यात्रा के सदस्य पर्यावरण संरक्षण के लिए समय निकाल रहे हैं, जो समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझकर इसमें योगदान दे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रखा जा सकता है। पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी लोगों की सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव जरूरी है।
इस मौके पर अभियान के सदस्य अजीत कुमार ने मृदा संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मिट्टी पृथ्वी का एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है, जो वनस्पतियों के विकास और मानव जीवन के अस्तित्व में अहम भूमिका निभाती है। जिस प्रकार जीवन के लिए हवा और पानी आवश्यक हैं, उसी प्रकार मिट्टी भी बेहद जरूरी है। मिट्टी के माध्यम से ही पेड़-पौधों को पोषण मिलता है और कृषि उत्पादन संभव हो पाता है।
उन्होंने कहा कि मानवीय गतिविधियों के कारण मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। मृदा का क्षरण और प्रदूषण पर्यावरण के संतुलन के साथ-साथ जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों और मानव जीवन को भी प्रभावित करता है। ऐसे में मृदा संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने वृक्षारोपण को मृदा अपरदन रोकने का प्रभावी उपाय बताते हुए अधिक से अधिक पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की।
इस 564वीं साइकिल यात्रा में हरेराम सिंह, शेषनाथ राय, संदीप रंजन, राहुल ऋतुराज, अजीत कुमार, आंचल कुमारी, रविन्द्र और संजय कुमार सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।





