भागलपुर: जिले के नाथनगर प्रखंड अंतर्गत पुरानी सराय स्थित मां दुर्गा का प्राचीन मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पारंपरिक पूजा-पद्धति और अनूठी धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना पुश्तैनी मंदिर है। समय के साथ मंदिर की स्थिति जर्जर हो गई थी, जिसके बाद चंदा सिन्हा ने इसका जीर्णोद्धार कराया और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की परंपरा को आगे बढ़ाया। पिछले करीब 30 वर्षों से यहां नियमित रूप से मां दुर्गा की पूजा की जा रही है।
शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है। सप्तमी पूजा के अवसर पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में मां के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। भक्त मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
मिथिला विधि-विधान से होती है पूजा
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां मां दुर्गा की पूजा पारंपरिक मिथिला विधि-विधान से किया जाना है। वर्षों से चली आ रही इस पूजा-पद्धति को आज भी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाया जा रहा है। मंदिर में पंडित चंदन मिश्रा विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करा रहे हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां दुर्गा अवश्य पूरी करती हैं। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु दूर-दूर से मंदिर पहुंचकर माता रानी के दर्शन करते हैं।
कौड़ी लूटने की अनोखी परंपरा
पुरानी सराय के इस प्राचीन दुर्गा मंदिर की एक खास पहचान वर्षों से चली आ रही कौड़ी लूटने की परंपरा भी है। इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालु बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। स्थानीय मान्यता है कि कौड़ी प्राप्त करने वाले भक्तों पर मां दुर्गा की विशेष कृपा बनी रहती है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
यही अनोखी परंपरा इस मंदिर को क्षेत्र के अन्य दुर्गा मंदिरों से अलग पहचान देती है।
आस्था और विरासत का प्रतीक है मंदिर
करीब पांच शताब्दियों के इतिहास और तीन दशकों से जारी नियमित पूजा-अर्चना के साथ यह मंदिर पुरानी सराय की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। यहां पूजा-पद्धति और कौड़ी लूटने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का प्रतीक बनी हुई है। नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी इसकी धार्मिक महत्ता को दर्शाती है।
नाथनगर के प्राचीन मंदिर में सप्तमी पर उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, चंदा सिन्हा पिछले 30 वर्षों से संभाल रहीं नियमित पूजा की परंपरा
भागलपुर: जिले के नाथनगर प्रखंड अंतर्गत पुरानी सराय स्थित मां दुर्गा का प्राचीन मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पारंपरिक पूजा-पद्धति और अनूठी धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना पुश्तैनी मंदिर है। समय के साथ मंदिर की स्थिति जर्जर हो गई थी, जिसके बाद चंदा सिन्हा ने इसका जीर्णोद्धार कराया और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की परंपरा को आगे बढ़ाया। पिछले करीब 30 वर्षों से यहां नियमित रूप से मां दुर्गा की पूजा की जा रही है।
शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है। सप्तमी पूजा के अवसर पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में मां के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। भक्त मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
मिथिला विधि-विधान से होती है पूजा
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां मां दुर्गा की पूजा पारंपरिक मिथिला विधि-विधान से किया जाना है। वर्षों से चली आ रही इस पूजा-पद्धति को आज भी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाया जा रहा है। मंदिर में पंडित चंदन मिश्रा विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करा रहे हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां दुर्गा अवश्य पूरी करती हैं। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु दूर-दूर से मंदिर पहुंचकर माता रानी के दर्शन करते हैं।
कौड़ी लूटने की अनोखी परंपरा
पुरानी सराय के इस प्राचीन दुर्गा मंदिर की एक खास पहचान वर्षों से चली आ रही कौड़ी लूटने की परंपरा भी है। इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालु बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। स्थानीय मान्यता है कि कौड़ी प्राप्त करने वाले भक्तों पर मां दुर्गा की विशेष कृपा बनी रहती है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
यही अनोखी परंपरा इस मंदिर को क्षेत्र के अन्य दुर्गा मंदिरों से अलग पहचान देती है।
आस्था और विरासत का प्रतीक है मंदिर
करीब पांच शताब्दियों के इतिहास और तीन दशकों से जारी नियमित पूजा-अर्चना के साथ यह मंदिर पुरानी सराय की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। यहां पूजा-पद्धति और कौड़ी लूटने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का प्रतीक बनी हुई है। नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी इसकी धार्मिक महत्ता को दर्शाती है।






