आठ साल की उम्र से थाम रखी है कूची, अब महाभारत के आठ चित्रों से दिखाएंगी अपनी प्रतिभा

भोजपुर। प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती और मेहनत के दम पर छोटी उम्र में भी बड़ी पहचान बनाई जा सकती है। इसकी मिसाल हैं भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड के धनडीहा गांव की रिया नंदनी। महज आठ साल की उम्र में पेंटिंग की शुरुआत करने वाली रिया अब महाभारत के आठ चित्रों के जरिए भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं को कैनवास पर उकेरने की तैयारी कर रही हैं। नवरात्र के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय प्रदर्शनी में उनकी कलाकृतियां आकर्षण का केंद्र बनेंगी।

महाभारत के प्रसंगों को देंगी कलात्मक रूप

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बीए की पढ़ाई कर रहीं रिया को बचपन से ही पेंटिंग का शौक रहा है। धीरे-धीरे उनका यह शौक जुनून में बदल गया। पिछले करीब पांच वर्षों से वह नियमित रूप से कला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ऑयल पेंटिंग, एक्रेलिक पेंटिंग, वाटर कलर और स्केचिंग जैसी विधाओं में उनकी विशेष रुचि है। अपनी कला को बेहतर बनाने के लिए वह लगातार अभ्यास करती हैं और ऑनलाइन माध्यम से भी नई तकनीक सीखती हैं।

नवरात्र में सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि को आयोजित होने वाली प्रदर्शनी में रिया महाभारत पर आधारित आठ चित्र प्रस्तुत करेंगी। इन चित्रों के माध्यम से वह महाभारत के प्रमुख पात्रों और प्रसंगों को रंगों के सहारे जीवंत रूप देने की कोशिश करेंगी।

प्रदर्शनी में 11 अन्य लड़कियां भी लेंगी हिस्सा

धनडीहा गांव में पिछले तीन वर्षों से आयोजित हो रही इस प्रदर्शनी में इस बार भी अलग-अलग विषयों और शैलियों की कलाकृतियां देखने को मिलेंगी। इसमें दरभंगा, मुजफ्फरपुर और पटना समेत अन्य जिलों के प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। रिया के साथ कला से जुड़ी 11 अन्य लड़कियां भी प्रदर्शनी की तैयारी में जुटी हैं।

ऑनलाइन पढ़ाने से हर महीने 20 हजार रुपये की कमाई

रिया की प्रतिभा केवल पेंटिंग तक सीमित नहीं है। वह दिल्ली की रेयांश एकेडमी से ऑनलाइन शिक्षक के रूप में भी जुड़ी हैं। यहां वह बेसिक ड्राइंग और ड्राइंग फंडामेंटल से जुड़े कार्य करती हैं। साथ ही, ऑनलाइन जमा होने वाली कलाकृतियों की जांच भी करती हैं। इस काम के लिए उन्हें हर महीने 20 हजार रुपये मिलते हैं।

रिया की मां रीता देवी गृहिणी हैं, जबकि पिता बबलू पंडित को अपनी बेटी की उपलब्धियों पर गर्व है। परिवार का प्रोत्साहन और रिया की मेहनत उनकी सफलता में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अब महाभारत पर आधारित आठ चित्रों के जरिए रिया अपनी कला को नई पहचान देने और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को रंगों में सहेजने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

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