18 महीने के मासूम के सिर का वजन 10 किलो! इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर काट रहे माता-पिता, अब सरकार से लगाई मदद की गुहार

बिहार के सोनपुर से एक ऐसे मासूम की कहानी सामने आई है, जिसके माता-पिता अपने बच्चे के इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बच्चा महज 18 महीने का है। परिजनों का दावा है कि उसके सिर का वजन करीब 10 किलो हो गया है। जन्म के सात दिन बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। इसके बाद परिवार ने पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और एम्स पटना समेत कई अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लगाई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे माता-पिता अब सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

यह कहानी सोनपुर के सबलपुर दियारा क्षेत्र के रहने वाले सुभाष कुमार और उनके 18 महीने के बेटे लव-कुश की है। परिजनों के मुताबिक, वर्ष 2025 में जन्म के समय बच्चा सामान्य था, लेकिन जन्म के महज सात दिन बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद परिवार की मुश्किलें बढ़ती चली गईं।

Sponsored Advertisement

बच्चे को पहले स्थानीय डॉक्टर को दिखाया गया। फिर बेहतर इलाज की उम्मीद में माता-पिता उसे लेकर पटना के पीएमसीएच पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि वहां से उन्हें इलाज का स्पष्ट रास्ता नहीं मिल पाया। इसके बाद उन्होंने आईजीआईएमएस और एम्स पटना में भी संपर्क किया, लेकिन परिवार के मुताबिक, समस्या का समाधान नहीं हुआ।

आज बच्चा करीब 18 महीने का हो चुका है। परिजनों का दावा है कि उसके सिर का वजन लगभग 10 किलो है। हालांकि, बच्चे की बीमारी क्या है और उसकी स्थिति के पीछे क्या कारण हैं, इसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट और विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच के बाद ही हो सकती है।

परिवार का कहना है कि उन्होंने त्रिपोलिया अस्पताल और निजी डॉक्टरों से भी सलाह लेने की कोशिश की, लेकिन अब तक उन्हें इलाज की स्पष्ट दिशा नहीं मिल सकी है।

वीओ: मासूम की बीमारी के साथ परिवार आर्थिक तंगी से भी जूझ रहा है। मजदूरी कर घर चलाने वाले माता-पिता के लिए बार-बार अस्पताल जाना, जांच कराना और इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। दियारा क्षेत्र में बाढ़ और फसल बर्बाद होने जैसी समस्याएं भी उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती हैं।

अब माता-पिता सरकार, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से बच्चे की उचित जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में इलाज और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

सवाल यह है कि आखिर इस मासूम को बेहतर इलाज कब मिलेगा और उसके माता-पिता की मदद के लिए जिम्मेदार विभाग कब आगे आएंगे? फिलहाल परिवार को अपने बच्चे के इलाज के लिए मदद का इंतजार है।

Related Posts

करमचट डैम पर दो विभागों में टकराव, एक-दूसरे का रास्ता रोकने का वीडियो वायरल

रोहतास जिले के चेनारी प्रखंड स्थित करमचट डैम पर वन विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के बीच रास्ते को लेकर विवाद सामने आया है। बीते गुरुवार को दोनों…

धनबाद के झारखंड मैदान में सत्यम शिवम सुंदरम पूजा कमिटी के पंडाल का भव्य उद्घाटन, 27वें वर्ष में पहुंचा दुर्गोत्सव

झारखंड मैदान में दुर्गापूजा का उत्साह चरम पर है। सत्यम शिवम सुंदरम पूजा कमिटी की ओर से आयोजित दुर्गोत्सव का धनबाद विधायक राज सिन्हा ने भव्य उद्घाटन किया। इस मौके…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *