बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र की रामपुर श्यामचंद पंचायत में गंगा नदी में हुए नाव हादसे के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। हादसे में 13 बच्चों के शव बरामद किए जाने के बाद लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आक्रोशित ग्रामीणों ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से भी रोक दिया। ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए राघोपुर सीओ को बर्खास्त करने और उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने की मांग की है।
वैशाली के राघोपुर में गंगा नदी पर हुए नाव हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चे भोज खाने के लिए गंगा नदी के उस पार जा रहे थे। जिस नाव पर वे सवार थे, वह पहले से ही जर्जर थी और उसमें दरार भी थी। ग्रामीणों का दावा है कि नाव बदलने के लिए प्रशासन को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
हादसे के बाद मौके पर पहुंचीं वैशाली की डीएम और एसएसपी को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि सूचना देने के करीब 45 मिनट बाद सरकारी मदद पहुंची। स्थानीय निवासी रवि यादव के मुताबिक, नाव बीच गंगा में फट गई, जिसके बाद 30 से 35 लोग डूबने लगे। उनका कहना है कि कई बच्चों को स्थानीय ग्रामीणों ने ही बचाया।
ग्रामीणों ने राघोपुर पीएचसी की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। रवि यादव ने आरोप लगाया कि अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर और स्ट्रेचर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि जर्जर नाव की शिकायत सीओ से की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण यह हादसा हुआ।
ग्रामीणों ने मांग की है कि राघोपुर सीओ को बर्खास्त कर उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। उनका कहना है कि पहले से शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करना गंभीर लापरवाही है।
इधर, सुबह होते ही लापता लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक 13 शव बरामद किए गए हैं और सात घायल बच्चों की पुष्टि हुई है। वहीं, 10 से 15 लोगों की तलाश जारी है। नाव पर कुल कितने लोग सवार थे, इसकी स्पष्ट जानकारी प्रशासन के पास भी नहीं है।





