शक्ति, साधना और संस्कार का पर्व है शारदीय नवरात्र : आचार्य डॉ. नवनीत कुमार

सहरसा। शक्ति आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगा। विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र का शुभारंभ होगा। इस दिन घरों और पूजा स्थलों पर विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना शुरू की जाएगी। नवरात्र को लेकर सहरसा शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल बनने लगा है।

 

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विभिन्न पूजा समितियों ने पंडाल निर्माण, आकर्षक विद्युत सज्जा, ध्वनि व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी तैयारियां तेज कर दी हैं। बाजारों में भी पूजा सामग्री, फल-फूल, चुनरी और प्रसाद सहित अन्य सामानों की खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ने लगी है।

 

नवरात्र के नौ दिनों में 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री, 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा, 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता, 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी और 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना होगी। 18 अक्टूबर को मां महागौरी की पूजा के साथ अष्टमी व्रत किया जाएगा।

 

विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि सुबह 8:04 बजे तक रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। 20 अक्टूबर, मंगलवार को महानवमी मनाई जाएगी। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के साथ नवरात्र हवन और पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा। इसके अगले दिन 21 अक्टूबर, बुधवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। इसके साथ दशहरा पर्व का उल्लास रहेगा और विभिन्न पूजा स्थलों से मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू होगा।

 

शक्ति के साथ संस्कार और सेवा का संदेश

 

हरि दर्शन सेवा संस्थान फाउंडेशन ट्रस्ट, सहरसा बिहार के संस्थापक आचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने कहा कि नवरात्र केवल देवी आराधना का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, साधना, संस्कार, नारी सम्मान और सेवा की चेतना जागृत करने वाला महापर्व है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा के नौ स्वरूप साहस, संयम, ज्ञान, करुणा और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हैं।

 

उन्होंने जिलेवासियों से नवरात्र और विजयादशमी पर्व को शांतिपूर्ण, सात्त्विक एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने की अपील की। साथ ही स्वच्छता, सेवा, सामाजिक सद्भाव और नारी सम्मान को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। आचार्य डॉ. नवनीत कुमार के अनुसार इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान गज की सवारी पर माना जा रहा है, जिसे धार्मिक परंपरा में शुभ संयोग के रूप में देखा जाता है।

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