सहरसा। नवहट्टा प्रखंड की बकुनिया पंचायत में 15वीं वित्त आयोग के तहत संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच पंचायत में कराई गई विभिन्न योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है। कुछ योजनाओं में संदिग्ध मजदूर भुगतान और फर्जी भुगतान के माध्यम से सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में 15वीं वित्त आयोग के तहत कई योजनाओं को सरकारी अभिलेखों में पूर्ण दिखाया गया है, जबकि स्थल पर उनकी स्थिति अलग नजर आती है। आरोप है कि कुछ जगहों पर योजनाओं का काम या तो शुरू ही नहीं हुआ या निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। ऐसे में योजनाओं पर सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिलने का सवाल उठ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार योजनाओं की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कार्यों के बीच अंतर की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका आरोप है कि कुछ योजनाओं को बिना पर्याप्त स्थल सत्यापन के पूर्ण दिखाकर भुगतान किए जाने की आशंका है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
हालांकि, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए वित्तीय अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना बाकी है। इसलिए जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 15वीं वित्त आयोग के तहत बकुनिया पंचायत में स्वीकृत, संचालित और पूर्ण बताई गई सभी योजनाओं की स्थल जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही योजनाओं से संबंधित अभिलेख, मापी पुस्तिका, स्वीकृति पत्र, भुगतान विवरण और मजदूरों को किए गए भुगतान का सत्यापन कराने की मांग की गई है।
अब प्रशासनिक स्तर पर होने वाली जांच पर ग्रामीणों की नजर है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में वास्तव में कोई वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं और सरकारी राशि का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया है या नहीं।






