पटना जिले के बिहटा प्रखंड के अम्हारा गांव स्थित NSMCH अस्पताल में शुक्रवार को ‘फॉरेंसिक ज्यूरिस्कन 2026’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम में NSMCH के मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्ण मुरारी सिंह, संस्थान के अधिकारी-कर्मी, मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं और बिहार-झारखंड से फॉरेंसिक कानून एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे। कार्यक्रम में करीब 60 फॉरेंसिक एक्सपर्ट और डॉक्टरों ने हिस्सा लिया।
राज्यपाल बनने के बाद सैयद अता हसनैन पहली बार बिहटा पहुंचे। NSMCH के मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्ण मुरारी सिंह ने उनका अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न देकर स्वागत एवं सम्मान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने फॉरेंसिक साइंस की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज फॉरेंसिक विज्ञान पहले की तुलना में काफी बेहतर तरीके से काम कर रहा है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में इसका लाभ मिल रहा है और जांच प्रक्रिया को भी मजबूती मिलती है। अपराध की जांच से लेकर आपदा प्रबंधन तक फॉरेंसिक साइंस का महत्वपूर्ण योगदान है।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में नेपाल में आई तबाही के दौरान भी फॉरेंसिक साइंस की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आपदा के बाद पहचान और जांच की प्रक्रिया में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक काफी उपयोगी साबित होती है।
राज्यपाल ने NSMCH में आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि फॉरेंसिक विषय पर इस तरह का आयोजन महत्वपूर्ण है। उन्होंने संस्थान की गतिविधियों की भी प्रशंसा की और कहा कि यहां मेडिकल साइंस के साथ-साथ फॉरेंसिक की पढ़ाई पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान फॉरेंसिक विज्ञान, कानून और चिकित्सा के बीच समन्वय तथा बदलती तकनीक के इस्तेमाल पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य फॉरेंसिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और चिकित्सा एवं कानून के विद्यार्थियों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान करना है।





