बिजली बहाली की जल्दबाजी में उखाड़ा गया वर्षों पुराना पेड़, हरित क्रांति के दावों पर उठे सवाल


सहरसा: मंगलवार देर शाम आई तेज आंधी और बारिश के बाद सहरसा शहर के नया बाजार, न्यू कॉलोनी समेत कई रिहायशी इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई। करीब चार घंटे तक अंधेरे में रहने को मजबूर लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली विभाग की टीम ने देर रात तक मरम्मत कार्य चलाकर लगभग 12:45 बजे आपूर्ति बहाल की, लेकिन कुछ ही देर बाद फिर बिजली गुल हो जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई।

जानकारी के अनुसार तेज आंधी और बारिश के कारण कई जगहों पर पेड़ और टहनियां बिजली तारों पर गिर गई थीं, जिससे विद्युत व्यवस्था प्रभावित हुई। बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए विभागीय टीम और वन विभाग के कर्मियों ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया। इस दौरान कई टहनियों और पौधों को हटाया गया ताकि तारों को नुकसान से बचाया जा सके।

हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि केंद्रीय विद्यालय के समीप स्थित एक वर्षों पुराने और विशाल वृक्ष को बचाने की कोशिश करने के बजाय उसे जड़ से उखाड़ दिया गया। लोगों का कहना है कि पेड़ को काटे बिना भी बिजली बहाल करने के विकल्प मौजूद थे, लेकिन जल्दबाजी में ऐसा कदम उठाया गया जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा।

घटना के बाद पर्यावरण संरक्षण और हरित क्रांति को लेकर प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक ओर सरकार बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाकर हरियाली बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों पुराने पेड़ों को संरक्षित रखने के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई जाती।

नागरिकों ने यह भी बताया कि केंद्रीय विद्यालय के आसपास का इलाका पहले भी पेड़ों से जुड़े हादसों का गवाह रहा है। बीते वर्षों में आंधी-तूफान के दौरान पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल भी हुए थे। इसके बावजूद संभावित खतरनाक पेड़ों की पहचान और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली आपूर्ति बहाल करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए। वहीं इस पूरे मामले पर मौके पर मौजूद बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

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