
भागलपुर। शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों को पूर्णकालिक कार्य का दर्जा देने की मांग को लेकर भागलपुर जिला इकाई ने संघर्ष की रणनीति तैयार की है। इसी को लेकर सैनडिस्क कंपाउंड स्थित योग स्थल पर संगठन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अनुदेशकों की विभिन्न समस्याओं, अधिकारों और आगामी आंदोलन की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक भागलपुर जिला अध्यक्ष अभय मिश्रा ने की। उन्होंने संगठन के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि अनुदेशक विद्यालयों में सिर्फ शारीरिक शिक्षा तक सीमित भूमिका नहीं निभाते हैं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। खेल गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में स्वास्थ्य, अनुशासन और खेल के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम किया जा रहा है।
अभय मिश्रा ने कहा कि विद्यालयों के बेहतर संचालन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों का विद्यालय में पूरा समय रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अनुदेशकों को कागजों पर भले ही अंशकालिक कर्मचारी माना जाता है, लेकिन उनसे कई ऐसे कार्य लिए जाते हैं, जिनमें पूरे दिन जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिला स्तर पर आयोजित एसजीएफआई गेम सहित विभिन्न खेल आयोजनों में अनुदेशकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। इसके अलावा अनुदेशक विद्यालय के विद्यार्थियों को प्रखंड से जिला, जिला से राज्य और राज्य से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक लेकर जाते हैं। इन गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रहती है।
बैठक में संगठन की ओर से सरकार से मांग की गई कि शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों को उनके कार्य और जिम्मेदारियों के अनुरूप पूर्णकालिक दर्जा दिया जाए। संगठन का कहना है कि इससे अनुदेशकों को उचित सम्मान और अधिकार मिल सकेगा।
बैठक के दौरान पदाधिकारियों और सदस्यों ने मांग पूरी होने तक संघर्ष को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा की। अध्यक्ष अभय मिश्रा ने सभी सदस्यों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।





