गया के बोधगया स्थित Magadh vishwavidyalay में पहली बार पूर्ववर्ती छात्र महासंगम का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में 5000 से अधिक पूर्व छात्र शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मझी समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।
करीब 64 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित इस महासंगम में विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास, उपलब्धियों और चुनौतियों को याद किया गया। कार्यक्रम में शामिल पूर्व छात्रों ने अपने छात्र जीवन की यादों को साझा किया और इसे भावनात्मक मिलन बताया।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, मगध विश्वविद्यालय की स्थापना 1 मार्च 1962 को हुई थी। शुरुआत में इसे आरा में स्थापित करने की योजना थी, लेकिन तत्कालीन शिक्षा मंत्री के प्रयासों से इसे बोधगया में स्थापित किया गया। शंकराचार्य मठ के महंत सत्यानंद गिरी ने 500 एकड़ भूमि दान में दी थी।
कार्यक्रम में जब जीतन राम मांझी पहुंचे, तो पूर्व छात्रों ने उन्हें मगही अंदाज में ‘बड़का भैया’ कहकर स्वागत किया। अपने संबोधन में मांझी ने विश्वविद्यालय के पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय यह पूर्वी भारत का दूसरा सबसे बड़ा विश्वविद्यालय था, लेकिन बाद में इसकी स्थिति कमजोर हो गई। हालांकि अब यह फिर से अपनी पहचान बना रहा है।
उन्होंने शिक्षा को सामाजिक बराबरी का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए कहा कि खासकर पिछड़े और अनुसूचित वर्ग के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने समान शिक्षा प्रणाली लागू करने पर जोर दिया।
वहीं, कुलपति प्रो. एस.पी. शाही ने इसे विश्वविद्यालय के 65 साल के इतिहास का ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों का एक मजबूत संगठन बनाया जाएगा और इसे हर साल आयोजित करने की योजना है।
कार्यक्रम के अंत में कुलपति ने कई बड़ी घोषणाएं कीं। 34 करोड़ रुपये की लागत से एक मल्टीपरपज परीक्षा भवन बनाया जाएगा, जिसका नाम मुख्यमंत्री के नाम पर रखा जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय में एआई आधारित शिक्षा शुरू करने की भी योजना है।
