नागपुर, महाराष्ट्र: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS ने मंगलवार को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित रेशमबाग मैदान में अपना वार्षिक विजयादशमी समारोह आयोजित किया। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की और संगठन के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की। समारोह में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और मुंबई में इजराइल के कॉन्सुल जनरल समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए।
विजयादशमी समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने भारत की विविधता, सामाजिक सद्भाव, धार्मिक मूल्यों और स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने संत रविदास, स्वामी श्रद्धानंद और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के योगदान को याद किया। भागवत ने कहा कि विदेशी हमलावरों के अत्याचार और भय के माहौल के बीच संत रविदास ने स्वधर्म के प्रति निष्ठा, सामाजिक सद्भाव और भक्ति का संदेश दिया। उनके विचारों ने समाज को हौसला दिया और लोगों की आस्था को मजबूत बनाए रखा।
संघ प्रमुख ने स्वामी श्रद्धानंद और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के योगदान और बलिदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने ओडिशा में आदिवासी समाज की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
भागवत ने पंच परिवर्तन की अवधारणा का जिक्र करते हुए आत्म-जागरूकता और स्वदेशी अपनाने को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में लिखे ‘हम, भारत के लोग’ शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को एकजुट और मजबूत बनाने के लिए अपनी पहचान और नैतिक मूल्यों को समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि RSS पिछले 100 वर्षों से भारत में आत्म-जागरूकता बढ़ाने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से काम कर रहा है। भागवत के मुताबिक, भारत विविधताओं का देश है और विविधता को स्वीकार करना तथा उसकी रक्षा करना हमारी पारंपरिक विशेषता रही है।
गौरतलब है कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में RSS की स्थापना की थी। इस वर्ष संघ अपने शताब्दी समारोहों के समापन के अवसर पर विजयादशमी मना रहा है।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, खुशहाली और सफलता लेकर आए।





