बिहार में 212 बालू घाटों पर खनन शुरू, कीमतों में कमी की उम्मीद; सरकार को 1220 करोड़ का राजस्व

बिहार में मानसून सीजन समाप्त होने के साथ ही बालू खनन पर लगा प्रतिबंध हट गया है। राज्य के 212 बालू घाटों पर आज से दोबारा खनन का काम शुरू हो गया है। इससे निर्माण कार्यों में तेजी आने और बालू की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, बालू खनन और बिक्री से बिहार सरकार के राजस्व में भी इस साल अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार को चालू वित्तीय वर्ष में सितंबर तक 1220 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई भी तेज की गई है।

बिहार में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के नियमों के तहत 15 जून से 15 अक्टूबर तक बालू खनन पर रोक लगाई गई थी। प्रतिबंध की अवधि समाप्त होने के बाद अब राज्य के 212 बालू घाटों पर वैध रूप से खनन कार्य शुरू हो गया है। इनमें 181 पीले बालू और 31 उजले बालू के घाट शामिल हैं।

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बालू खनन से सरकार को मिलने वाले राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सितंबर तक बिहार सरकार को 1220.53 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसी अवधि के दौरान 862.64 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। इस तरह पिछले साल की तुलना में राजस्व में 357.89 करोड़ रुपये यानी 41.48 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, राज्य में बालू खनन का कार्य पर्यावरणीय मानकों और सरकारी नियमों के अनुरूप कराया जा रहा है। वहीं, 10 नए बालू घाटों की निविदा प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। इससे सरकार को 76 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।

वीओ: खनन शुरू होने से बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है। इससे मकान निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों को गति मिल सकती है। साथ ही आपूर्ति सामान्य होने पर बालू की कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

दूसरी ओर, अवैध बालू खनन के खिलाफ सरकार की कार्रवाई जारी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 393 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और 3614 वाहन जब्त किए गए हैं। इस दौरान 52.71 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है। पिछले वित्तीय वर्ष में 333 गिरफ्तारियां हुई थीं और 39.87 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया था।

कुल मिलाकर, बालू खनन दोबारा शुरू होने से जहां निर्माण क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं सरकार को राजस्व में बढ़ोतरी की भी संभावना है।

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