मुंबई: दर्द से राहत और काइरोप्रैक्टिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से डॉ. रजनीश कांत की पुस्तक ‘काइरोप्रैक्टर एंड फिजियोथेरेपिस्ट’ का लोकार्पण मुंबई के ताज होटल में किया गया। 14 अक्टूबर को आयोजित समारोह में मशहूर लेखक चेतन भगत ने मुख्य अतिथि के रूप में पुस्तक का अनावरण किया। टीएस पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में काइरोप्रैक्टिक चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं को सरल भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है।
समारोह के दौरान डॉ. रजनीश कांत ने मंच पर लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया। उन्होंने चेतन भगत की गर्दन से संबंधित समस्या पर अपनी तकनीक का प्रदर्शन किया। इसके बाद चेतन भगत ने तकनीक से आराम मिलने की बात कही और डॉ. रजनीश कांत के प्रयासों की सराहना की।
डॉ. रजनीश कांत ने कहा कि वह बचपन से चेतन भगत के उपन्यास पढ़ते रहे हैं और उनकी कहानियों पर आधारित फिल्में भी देखते रहे हैं। उनके हाथों अपनी पुस्तक का लोकार्पण होना उनके लिए गर्व और खुशी का क्षण है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल दर्द का इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों को दर्द के साथ जीवन बिताने की मजबूरी से राहत दिलाने के प्रति जागरूक करना है।
डॉ. कांत के अनुसार, पुस्तक में काइरोप्रैक्टिक की उत्पत्ति, इसकी बुनियादी जानकारी, रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य, खिलाड़ियों और बुजुर्गों की देखभाल, इससे जुड़ी भ्रांतियों तथा मरीजों को जागरूक करने जैसे विषय शामिल हैं। पुस्तक में काइरोप्रैक्टिक क्लिनिक के संचालन और बेहतर उपचार के लिए सहयोग पर भी जानकारी दी गई है।
पुस्तक में कुल दस अध्याय हैं। डॉ. रजनीश कांत ने अपनी आरकेएम तकनीक और काइरोप्रैक्टिक के क्षेत्र में आधुनिक दृष्टिकोण को लेकर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और कुब्जा की कथा का उल्लेख करते हुए इस पद्धति की ऐतिहासिक जड़ों पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
समारोह में किन्नर जगतगुरु महामंडलेश्वर हिमांगी सखी भी उपस्थित रहीं। वहीं, सुप्रसिद्ध फिजियोथेरेपिस्ट प्रोफेसर डॉ. अली ईरानी का आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ। इस आयोजन के माध्यम से डॉ. रजनीश कांत ने काइरोप्रैक्टिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों तक इसके बारे में जानकारी पहुंचाने का संदेश दिया।






