बिहार के बेतिया में निगरानी विभाग ने एक घूसखोर अधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है. जिला गेव विकास कार्यालय में फ़ोर्सिएट फ़ोरम फ़ील्ड के अधिकारी अनुराग अभिषेक को निगरानी की टीम ने 30 हज़ार रुपये की रिश्वत लेकर न्यूड ले जाया। इस कार्रवाई के बाद जिलों में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, गौनाहा खंड के रहने वाले गुलाब कुमार ने पर्यवेक्षण विभाग में शिकायत दर्ज की थी। स्क्रैच ने बताया कि वे चार गाय समन्वित योजना के तहत नामांकित थे, जिसके लिए उन्हें सरकार की ओर से अनुदान कुमार नियुक्त किया गया था। आरोप है कि ग्रांट की राशी रिलीज करने के लिए बेंचमार्क फील्ड के डायरेक्टर अनुराग अभिषेक कॉन्स्टेंट से आग्रह कर रहे थे।
स्तोत्र कुमार के अनुसार, अधिकारी ने पहले ही “ऑफिस खर्च” और बंगले के नाम पर करीब 32 हजार रुपये प्रति शेयर में स्थापन के लिए करवा थे। इसके बावजूद ग्रांट की राशि जारी नहीं की गई। बाद में अधिकारी ने एक बार फिर 30 हजार रुपये नकद की मांग की।
शिकायत बैठक के बाद पटना से पर्यवेक्षण विभाग की विशेष टीम बेटिया डिपो और जाल बिछाया गया। तय योजना के तहत 30 हजार रुपए दिए गए अधिकारी को 30 हजार रुपए दिए गए, जिसके तहत सुपरवाइजर की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अनुराग अभिषेक को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई बेतिया के बानुछापर थाना क्षेत्र के हाजमा में हुई।
पर्यवेक्षण विभाग के वोट मिथलेश कुमार ने बताया कि गिरफ्तार अधिकारी बैंक योजना के तहत बैठक में एक लाख 90 हजार रुपये के अनुदान से 30 हजार रुपये रिश्वत के रूप में ले रहे थे। इसी दौरान टीम ने उन्हें पकड़ लिया। अपराधी के बाद अधिकारी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले जाया गया।
इस कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि वसूली करने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर पैसा नहीं मिलेगा। पर्यवेक्षण विभाग ने यह भी कहा है कि यदि किसी से अनुदान या सरकारी योजना के नाम पर छूट दी जाती है, तो उसकी शिकायत तुरंत की जाये।
