पटना: बिहार सरकार ने राज्य में रेत घाटों का ठेका लेने के बाद बीच में काम ठीक करने वाली योजना पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जो व्यापारी घाट लेकर उसके बीच में ही सरेंडर कर रहे हैं, उन्हें भविष्य में कंपनी टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा।

फोटोग्राफर सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने प्रेस वार्ता में कहा कि जिन बालू घाटों को जोड़ों ने सरेंडर कर दिया है, उनकी समीक्षा जिला स्तर पर की जाएगी। इसके लिए प्रोटोटाइप में प्रोटोटाइप जिला टास्क फोर्स को जिम्मेदारी दी गई है। टास्क फोर्स घाटों की स्थिति का आकलन करने के लिए एमटीएम के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार ने बंद किये घाटों के रेट में संशोधन कर जल्द ही नई निविदा जारी की।

मंत्री ने बताया कि बालू घाटों को सरेंडर करने के मामले में बड़ी साजिश की आशंका है, जिससे राज्य सरकार को करीब 700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ कंपनी ने पिछले साल की तुलना में तीन से चार गुना अधिक बोली लगाने वाले घाटों का ठेका लिया था, बाद में यह खुला घाट सरेंडर कर दिया कि उनका उद्घाटन नहीं हो रहा है। मंत्री के अनुसार कुछ रेतीले माफियाओं के रेकॉर्ड से ऐसा हुआ है।

सरकार ने अब ऐसे मामलों में दिखाए गए करीबी 78 सहयोगियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ब्लैकलिस्ट होने के बाद ये बैचलर फ्यूचर में किसी भी सरकारी टेंडर में हिस्सा नहीं लेगे।

राजस्व संग्रह को लेकर मंत्री ने कहा कि खान भूतत्व विभाग की आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जहां विभागों का राजस्व करीब 1600 करोड़ रुपये रहा, वहीं 2024-25 में यह उछाल 3500 करोड़ रुपये हो गया। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने 3800 करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य रखा है, जिसमें अब तक करीब 3000 करोड़ रुपये का राजस्व हो चुका है।

गैरकानूनी पर कार्रवाई को लेकर भी सरकार सक्रिय है। अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच राज्यभर में 31,297 मूर्तियाँ गिरफ़्तार हुईं, 1600 गिरफ़्तारियाँ हुईं और 400 लोगों को गिरफ़्तार किया गया। घाटों पर ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था पर नजर रखने की भी व्यवस्था की गई है। प्रेस वार्ता में विभाग के सचिव दिवेश सेहरा और निदेशक मनेश कुमार मीना भी मौजूद रहे।

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