पटना: बिहार महिला आयोग की ओर से जारी नोटिस पर पूर्णिया सांसद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश कर विवाद खड़ा किया गया, जबकि उनका मकसद महिलाओं के खिलाफ नहीं बल्कि राजनीति और समाज में होने वाले कथित शोषण के खिलाफ आवाज उठाना था।
सांसद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने बयान में यह मुद्दा उठाया था कि राजनीति में आने वाली कई महिलाओं को शोषण का सामना करना पड़ता है। यह कोई नया विषय नहीं है, बल्कि पहले भी कई मंचों पर इस पर चर्चा होती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान के कुछ हिस्सों को चुनकर पेश किया गया, जिससे गलत संदेश गया।
पप्पू यादव ने महिला आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पटना में नीट की छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या हुई या नालंदा में सरेआम महिला के साथ दुष्कर्म की कोशिश हुई, तब आयोग ने क्या कार्रवाई की? उन्होंने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड, सहरसा और पूर्णिया समेत कई जगहों पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों का जिक्र करते हुए आयोग की निष्क्रियता पर सवाल उठाया।
सांसद ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जिस पर व्यापक स्तर पर चर्चा और सख्त कार्रवाई की जरूरत है। उनका दावा है कि वे लगातार ऐसे मुद्दों को उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी का अपमान करना।
कटिहार में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि राजनीति का माहौल खराब हो चुका है और कई मामलों में महिलाओं का शोषण चिंता का विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके बयान को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत करना गलत है।
अंत में उन्होंने कहा कि वे नोटिस से डरने वाले नहीं हैं और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
