बिहार के नालंदा जिले में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन नाबालिग लड़कियों को भी बरामद किया है, जिन्हें बेचने की तैयारी की जा रही थी।
मामले की जानकारी देते हुए बिहार शरीफ सदर डीएसपी-2 संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि रहुई थाना क्षेत्र के बेसमक गांव से 9 अप्रैल को 13 और 14 वर्ष की दो नाबालिग लड़कियां अचानक लापता हो गई थीं। परिजनों की शिकायत पर 10 अप्रैल को मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस ने विशेष टीम गठित कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों लड़कियां राजस्थान के बीकानेर में हैं। इसके बाद नालंदा पुलिस की टीम ने राजस्थान पहुंचकर स्थानीय पुलिस के सहयोग से दोनों नाबालिगों को सकुशल बरामद कर लिया और एक दंपती को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दंपती ने खुलासा किया कि उन्होंने लड़कियों को तीन लाख रुपये में खरीदा था।
इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने नालंदा के राजगीर और नूरसराय में छापेमारी कर एक महिला तस्कर और उसके सहयोगी को भी गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान छत्तीसगढ़ के रायपुर की रहने वाली एक और किशोरी को भी बरामद किया गया। सभी बच्चियों को न्यायालय में पेश करने के बाद बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह नाबालिग लड़कियों को बेहतर जीवन और पैसों का लालच देकर उनका ब्रेनवॉश करता था और फिर उन्हें शादी के नाम पर बेच देता था। गिरफ्तार महिला तस्कर ने कबूल किया कि वह पहले भी कई लड़कियों को 1 से 1.5 लाख रुपये में बेच चुकी है। इस पूरे नेटवर्क का संबंध राजस्थान से जुड़ा हुआ है, जहां लड़कियों को कम कीमत में खरीदकर ऊंचे दामों में बेचा जाता था।
फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।
