ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब पूरी दुनिया पर दिख रहा है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया है। भारत भी इस संकट से डूबा नहीं है। देश के कई शहरों में एलपीजी उपभोक्ताओं की कमी देखने को मिल रही है, जिसके कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गैस की कमी के कारण कई जगहों पर लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश और पंजाब से दो बेहद विचित्र घटनाएं सामने आई हैं, जहां एलपीजी गैस लेने के लिए लाइन में लगकर दो बुजुर्गों की मौत हो गई। इन कहानियों में लोगों को झकझोर कर रख दिया गया है और प्रतिभागियों ने भी सरकार पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

पहली घटना उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले की घोषित जा रही है। जानकारी के अनुसार, इंडोनेशिया क्षेत्र के लाल सराय स्थित पानी की टंकी के पास भारत गैस एजेंसी के बाहर शुक्रवार सुबह लोग शामिल होने के लिए लाइन में लगे हुए थे। इसी दौरान 75 साल के मुख्तार भी लाइन में लगे थे। अचानक उनका विस्फोट हो गया और वे रोगी गिर गए। मौज़ूद पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें कब्रिस्तान की कोशिश की और सीपीआर डेक में लाने का प्रयास किया। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दार्शनिकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि वकील पहले से ही बीमार थे और लंबे समय तक लाइन में बने रहने के कारण उनकी तबीयत खराब हो गई थी।

ऐसी ही एक और घटना पंजाब से भी सामने आई है, जहां गैस सिलेंडर लेने के लिए लगी लाइन में एक बुजुर्ग की मौत हो गई। इन घटनाओं के सामने आने के बाद पूंजीवाद ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर दावा ठोकते हुए कहा कि देश में गैस की आपूर्ति के लिए आम लोगों के लिए जनवादी साबित हो रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार ऊर्जा संकट से पूरी तरह से विफल रही है और इसमें पूरी तरह से आम जनता को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं सरकार की ओर से अभी तक इन कहानियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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