इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) हर साल ऐसे खिलाड़ियों को सामने लाता है, जिनकी कहानी संघर्ष, मेहनत और सपनों से भरी होती है. सनराइजर्स हैदराबाद के युवा तेज गेंदबाज साकिब हुसैन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसने लाखों लोगों को प्रेरित किया है।
बिहार के गोपालगंज जिले से आने वाले 21 वर्षीय साकिब का बचपन बेहद गरीबी में बीता. उनके पिता किसान हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वे क्रिकेट खेलने के लिए जरूरी जूते तक नहीं खरीद सकते थे. साकिब खुद बताते हैं कि अच्छे स्पाइक्स की कीमत 10 से 15 हजार रुपये होती है, जो उनके लिए नामुमकिन था. ऐसे मुश्किल समय में उनकी मां ने अपने गहने बेचकर बेटे के सपने को जिंदा रखा और उसके लिए जूते खरीदे।
साकिब ने क्रिकेट की शुरुआत किसी बड़े अकादमी से नहीं, बल्कि अपने घर के पास मैदान से की. वह रोज सुबह दौड़ने जाते थे, जहां स्थानीय कोचों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया. शुरुआत में उन्होंने टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला और छोटे-छोटे मैच खेलकर 500 से 2000 रुपये तक कमाए. कई बार वह खेलने के लिए 150 किलोमीटर तक का सफर तय करते थे।
उनकी मेहनत रंग लाई जब उन्होंने 2022-23 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में बिहार के लिए डेब्यू किया और सिर्फ 17 साल की उम्र में शानदार प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया. इसके बाद रणजी ट्रॉफी में भी उन्होंने बेहतरीन गेंदबाजी कर अपनी पहचान मजबूत की।
साकिब पहले चेन्नई सुपर किंग्स के नेट बॉलर रहे और बाद में कोलकाता नाइट राइडर्स का हिस्सा भी बने, लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला. आखिरकार 2026 IPL नीलामी में सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें 30 लाख रुपये में खरीदा।
उन्होंने अपने IPL डेब्यू में ही राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 4 विकेट लेकर इतिहास रच दिया. साकिब हुसैन की कहानी बताती है कि अगर हौसला मजबूत हो, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।
