बिहार के गया से केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का बड़ा बयान सामने आया है, जिसने जनसंख्या और सियासत दोनों पर बहस छेड़ दी है। एक सवाल के जवाब में मांझी ने कहा कि लोगों को जनसंख्या बढ़ाने या बच्चा पैदा करने को लेकर संकीर्ण सोच नहीं रखनी चाहिए। उनका कहना था कि हर व्यक्ति अपने साथ क्षमता लेकर जन्म लेता है, इसलिए भविष्य की संभावनाओं को सीमित नहीं समझना चाहिए।
दरअसल, मांझी से यह सवाल उस बयान के संदर्भ में पूछा गया था, जिसमें ने नागपुर में हिंदुओं से चार बच्चे पैदा करने और एक बच्चे को आरएसएस में भेजने की बात कही थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मांझी ने सीधे तौर पर जनसंख्या नियंत्रण की अवधारणा से दूरी बनाते हुए कहा कि किसी को भी बच्चे पैदा करने में हिचक नहीं होनी चाहिए।
मांझी ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि जनसंख्या बढ़ने के साथ सबसे जरूरी है रोजगार और शिक्षा। उन्होंने कहा कि अगर समाज ईमानदारी से चले और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं, तो सभी का भरण-पोषण संभव है। उनका मानना है कि सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो बढ़ती आबादी भी देश के लिए बोझ नहीं बल्कि संसाधन बन सकती है।
इसके साथ ही उन्होंने एक ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि प्राचीन समय में भारत में बड़ी जनसंख्या होने के बावजूद देश को ‘जगतगुरु’ कहा जाता था। उन्होंने दावा किया कि उस समय जनसंख्या पर कोई रोक नहीं थी और समाज समृद्ध था।
हालांकि, मांझी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जनसंख्या नियंत्रण, संसाधनों का संतुलन और रोजगार जैसे मुद्दों पर अब नई बहस छिड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या के साथ-साथ शिक्षा और आर्थिक विकास पर संतुलित ध्यान देना बेहद जरूरी है, तभी समाज का समग्र विकास संभव हो पाएगा।
