देश के बड़े शहरों में काम करने वाले मजदूरों के लिए रसोई गैस की किल्लत और आसमान छूती कीमतें अब बड़ी मुसीबत बनती जा रही हैं। इसका असर अब साफ तौर पर देखने को मिल रहा है, जहां बड़ी संख्या में मजदूर अपने घरों की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं। भागलपुर रेलवे स्टेशन पर ऐसे ही कई मजदूरों की भीड़ देखने को मिली, जो बाहर से काम छोड़कर वापस लौटे हैं।

 

नई दिल्ली के आनंद विहार से गोड्डा जाने वाली गरीब रथ एक्सप्रेस से पहुंचे यात्रियों ने बताया कि जिन शहरों में वे काम कर रहे थे, वहां गैस की कीमत 400 से 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इतनी महंगी गैस खरीदना उनके लिए संभव नहीं रह गया, जबकि उनकी आय सीमित है।

 

सन्हौला निवासी मिथुन यादव ने बताया कि गैस की भारी कमी के कारण रोजमर्रा का खाना बनाना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे में मजबूरी में उन्हें अपना काम छोड़कर घर लौटना पड़ा। वहीं मुंगेर के संग्रामपुर निवासी रवि, जो वापस दिल्ली जाने की तैयारी में थे, ने कहा कि यदि गैस नहीं मिलेगी तो वे लकड़ी पर खाना बनाकर किसी तरह गुजारा करेंगे।

 

गरीब रथ से लौटे मोहम्मद दुरुल, नूर मोहम्मद, मोहम्मद चांद, अशोक साह, अंसार और मनोज तांती ने भी एक स्वर में कहा कि बाहर न केवल गैस की भारी किल्लत है, बल्कि इसकी कीमत भी बहुत अधिक हो गई है। ऐसे में रोज का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है, जिससे घर लौटना ही बेहतर विकल्प लगा।

 

मजदूरों का कहना है कि अब वे अपने गांव और आसपास के इलाकों में ही काम-धंधा तलाश करेंगे। गैस संकट ने उनकी रोज़ी-रोटी पर सीधा असर डाला है, जिससे बड़े शहरों से पलायन का सिलसिला फिर से शुरू होता नजर आ रहा है।

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