कहते हैं अगर हौसलों की उड़ान सच्ची हो तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी के रहने वाले विवेक यादव ने लिखी है। सीमित संसाधनों और लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार अपने सपने को सच कर दिखाया। विवेक यादव ने यूपीएससी 2025 की परीक्षा में 487वीं रैंक हासिल कर आईपीएस अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया है।

 

25 वर्षीय विवेक यादव का सफर संघर्ष, मेहनत और अटूट विश्वास की मिसाल है। उनके पिता नवलसिंह यादव चंदेरी नगर पालिका में ड्राइवर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां घर पर सिलाई मशीन चलाकर परिवार का खर्च चलाने में सहयोग करती रही हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद विवेक के माता-पिता ने कभी उनके सपनों को छोटा नहीं होने दिया। उन्होंने हर हाल में अपने बेटे की पढ़ाई जारी रखी और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

 

विवेक की सफलता रातों-रात नहीं आई। उन्होंने अपने जीवन में करीब 20 अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता का सामना किया। कई बार हार मिली, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। हर असफलता से उन्होंने नई सीख ली और अपनी कमियों को सुधारते हुए आगे बढ़ते रहे।

 

लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प का ही परिणाम था कि पिछले वर्ष उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर असिस्टेंट कमिश्नर रेलवे का पद हासिल किया था। लखनऊ में प्रशिक्षण के दौरान भी उनका लक्ष्य आईपीएस अधिकारी बनना ही रहा। ट्रेनिंग के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और पूरी लगन से तैयारी करते रहे।

 

आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी 2025 में 487वीं रैंक हासिल कर उन्होंने आईपीएस अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया। बेटे की इस उपलब्धि पर ड्राइवर पिता और सिलाई कर घर चलाने वाली मां की आंखों में खुशी और गर्व के आंसू साफ दिखाई दे रहे हैं।

 

विवेक यादव की यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो असफलताओं से घबराकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं। उनका कहना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता रोक नहीं सकती।

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