पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां निगरानी विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आदापुर थाना में कार्यरत एक प्राइवेट मुंशी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और थाना स्तर पर कामकाज की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, आदापुर थाना में मुंशी का काम कर रहे इंतखाब आलम को निगरानी विभाग की टीम ने ₹14 हजार घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि वह किसी काम के एवज में रिश्वत की मांग कर रहा था, जिसकी शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने जाल बिछाकर यह कार्रवाई की।
चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति कोई सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि एक प्राइवेट व्यक्ति था, जो लंबे समय से थाना में मुंशी का काम कर रहा था। इस खुलासे के बाद थाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस मामले को लेकर एसपी स्वर्ण प्रभात ने कहा है कि आरोपी एक निजी व्यक्ति था और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। वहीं रक्सौल एसडीपीओ को थाना अध्यक्ष की भूमिका की जांच सौंपी गई है।
सूत्रों की मानें तो इंतखाब आलम लंबे समय से कई थानाध्यक्षों के लिए दलाली का काम करता था और थाना स्तर पर उसकी अच्छी पकड़ थी। यही वजह है कि एक निजी व्यक्ति होने के बावजूद वह सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप कर रहा था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब थाना में सरकारी मुंशी या थाना लेखक की नियुक्ति होती है, तो फिर एक प्राइवेट व्यक्ति को इस तरह की जिम्मेदारी क्यों दी गई? क्या यह सब थाना अध्यक्ष की जानकारी में हो रहा था या फिर इसमें उनकी भी भूमिका रही है?
फिलहाल निगरानी विभाग की इस कार्रवाई के बाद आदापुर थाना सहित पूरे जिले में हलचल तेज है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में और कौन-कौन जिम्मेदार निकलते हैं और प्रशासन इस मामले में क्या सख्त कदम उठाता है।
