गयाजी में भूमि सुधार एवं जनकल्याण के उद्देश्य से आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब शेरघाटी निवासी जितेंद्र कुमार ने जनता दरबार के दौरान डिप्टी सीएम के समक्ष अपनी जमीन से जुड़ी गंभीर समस्याएं उठाईं। बुधवार को आयोजित इस कार्यक्रम में जितेंद्र कुमार ने आमस अंचलाधिकारी (सीओ) पर ₹25 हजार रुपये रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया, जिससे पूरे कार्यक्रम में हड़कंप मच गया।

 

जितेंद्र कुमार ने बताया कि आमस निवासी शंकर सिंह गलत कागजात के आधार पर उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कब्जे का विरोध करने पर उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। पीड़ित की बात सुनते ही मंच पर मौजूद अधिकारी और जनप्रतिनिधि गंभीर हो गए।

 

इसी दौरान मौके पर मौजूद शंकर सिंह के पुत्र रामाधार सिंह ने आरोपों पर आपत्ति जताते हुए दर्शक दीर्घा से उठकर मंच के पास पहुंचने की कोशिश की। रामाधार सिंह ऊंची और आक्रामक आवाज में अपनी बात रखने लगे और डिप्टी सीएम से मंच पर बोलने की अनुमति मांगने लगे। उनकी आक्रामकता के कारण जनसंवाद स्थल पर कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया।

 

स्थिति को बिगड़ता देख डिप्टी सीएम नाराज हो गए। उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए रामाधार सिंह को कार्यक्रम स्थल से बाहर करने का आदेश दिया, जिससे माहौल को नियंत्रित किया जा सका। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनसंवाद का मंच जनता की समस्याएं सुनने और समाधान के लिए है, न कि हंगामा करने के लिए।

 

वहीं आमस अंचलाधिकारी पर लगे रिश्वत के आरोप को गंभीरता से लेते हुए डिप्टी सीएम ने तत्काल प्रभाव से उनके अन्यत्र स्थानांतरण का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने एसएसपी और जिलाधिकारी को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र रिपोर्ट सौंपने का आदेश भी दिया।

 

डिप्टी सीएम ने भरोसा दिलाया कि जमीन विवाद और रिश्वत के आरोपों की गहराई से जांच होगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद जनसंवाद कार्यक्रम में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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