भोजपुर: बेहतर भविष्य और अच्छी नौकरी की उम्मीद में विदेश गए बिहार के दो किशोर अब कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय जालसाजों के शौक में फंस गए हैं। भोजपुर जिले के रहने वाले अमरजीत राम (25) और मनीष कुमार (28) करीब एक महीने पहले कंबोडिया में काम की तलाश में गए थे, लेकिन वहां उनकी स्थिति खराब हो गई। परिवार का आरोप है कि दोनों को साइबर स्ट्रेंथ में रहने के लिए मजबूर किया गया और उनके साथ गारमेंट के आरोप में जेल में डाल दिया गया।

सोसाइटी के अनुसार मुंबई की कुछ कंपनी ने होटल में दोनों गोदामों में नौकरी बेचने का लालच दिया था। उन्हें बताया गया कि हर महीने डेयरी प्लांट और होटल से जुड़े काम के लिए करीब 800 डॉलर मिलते हैं। बेहतर भविष्य की आशा में दोनों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और 29 जनवरी को कंबोडिया पर आक्रमण कर दिया।

अमरजीत के नमूने का कहना है कि कंबोडिया पहुंचने के तुरंत बाद एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने दोनों कारखाने अपने व्यवसाय में ले लिए। वहां पर साइबर परमाणु उद्यम की कोशिश की गई। जब उन्होंने इस काम से इनकार कर दिया तो वे अपने साथी के साथ चले गए और उनके पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज छीन लिए गए।

परिवार का आरोप है कि प्लास्टिक के गोदाम से दोनों गोदामों को गोदाम में रखकर फ़ॉक्सकर जेल भेज दिया गया। इससे पहले अमरजीत और मनीष ने अपने परिवार को फोन कर वहां की खराब स्थिति के बारे में बताया था। उन्होंने कहा कि उन्हें ठीक से खाना भी नहीं दिया जा रहा है और उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

अमरजीत के पिता हृदयानंद राम, जो परिवार के संस्थापक हैं, ने बताया कि बेटे को विदेश जाने के लिए रिश्तेदारों और पड़ोसियों से कर्ज लेना था। अब अलग-अलग नंबरों से खुद को वकील या अधिकारी को फोन कर बताए गए लोग 5 से 6 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं और पैसे न देने पर गंभीर परिणाम की धमकी दे रहे हैं।

यहां मनीष कुमार के परिवार की स्थिति भी बेहद मशहूर है। उनकी पत्नी और तीन छोटे बच्चे गांव में हैं और परिवार उनकी सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहा है। वित्त ने इस मामले में जिला प्रशासन, केंद्र और राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

इस बीच आरा के न्यूनतम ने भी भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है और कंबोडिया सरकार से बात कर दोनों गरीबों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

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