जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान बिहार के नवगछिया, भागलपुर के रहने वाले संतोष यादव वीरगति को प्राप्त हो गए। इस दुखद घटना ने न केवल उनके परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया, बल्कि पूरे बिहार राज्य को भी गर्व और पीड़ा से भर दिया। संतोष यादव की शहादत पर पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है, लेकिन अब उनकी शहादत के बाद मुआवजा राशि को लेकर एक नई बहस खड़ी हो गई है।

संतोष यादव के परिजनों ने सरकार द्वारा दिए गए मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए सवाल उठाए हैं और न्याय की मांग की है। परिजनों का कहना है कि जब ऑपरेशन सिंदूर के तहत शहीद हुए जवानों को 50 लाख रुपये की सहायता राशि दी जा रही है, तो उनके बेटे को केवल 21 लाख रुपये ही क्यों दिए गए?

शहीद संतोष यादव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भागलपुर के जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने बिहार सरकार की ओर से 21 लाख रुपये का चेक उनके परिजनों को सौंपा। लेकिन इस दौरान परिजनों ने स्पष्ट रूप से अपनी असंतुष्टि जताई। संतोष यादव के पिता ने भावुक होते हुए कहा, “हमने अपने बेटे को देश की सेवा में खो दिया। यह कोई साधारण क्षति नहीं है। जब बाकी शहीदों के परिजनों को 50 लाख की राशि मिल रही है, तो हमारे बेटे के लिए अलग मापदंड क्यों?”

परिजनों का यह भी कहना है कि संतोष यादव भी आतंक विरोधी ऑपरेशन में शामिल थे और उन्होंने ऑपरेशन के दौरान ही अपने प्राण गंवाए। ऐसे में उन्हें भी उसी श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए, जिस नीति के तहत ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों को मुआवजा दिया जाता है।

शहीद की पत्नी ने कहा, “सरकार ने हमें 21 लाख रुपये का चेक दिया है, लेकिन यह शहादत की कीमत नहीं है। हमें पैसे की लालच नहीं है, हमें अपने पति की शहादत का सम्मान चाहिए। जब सरकार एक नीति के तहत सहायता देती है, तो वह सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।”

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी शहीद के परिजनों की मांग का समर्थन किया है। नवगछिया और भागलपुर में कई स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें लोगों ने सरकार से मांग की कि संतोष यादव के परिवार को भी पूर्ण मुआवजा मिले और शहीद की शहादत का समुचित सम्मान किया जाए।

सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारी का कहना है कि यह मामला उनकी जानकारी में आया है और इसकी जांच की जाएगी कि किस नीति के तहत यह मुआवजा दिया गया है और क्या वाकई में इसमें किसी तरह का भेदभाव हुआ है। यदि जांच में यह सामने आता है कि संतोष यादव ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत शहीद हुए हैं, तो उनके परिजनों को भी उसी के अनुरूप सहायता राशि दी जाएगी।

बिहार सरकार की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक बयान इस मुद्दे पर नहीं आया है, लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से यह मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है।

संतोष यादव की शहादत केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य और देश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी इस वीरता को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

यह केवल एक आर्थिक सहायता का मामला नहीं है, यह सम्मान और नीतिगत पारदर्शिता का सवाल है। जब एक ही तरह के ऑपरेशन में शहीद हुए जवानों को अलग-अलग मुआवजा दिया जाता है, तो यह न केवल नीतिगत असमानता को दर्शाता है बल्कि शहीदों के सम्मान पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

शहीद संतोष यादव के परिजनों ने अंत में सरकार से अपील की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और उन्हें उनका पूरा हक दिया जाए। “हम चाहते हैं कि हमारे बेटे की शहादत को भी वैसा ही सम्मान मिले, जैसा और शहीदों को मिला है। यही हमारा हक है, यही इंसाफ है,” शहीद के भाई ने कहा।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारे देश में शहीदों के लिए तय की गई नीतियां वास्तव में समान रूप से लागू हो रही हैं? क्या हर शहीद का परिवार अपने वीर सपूत के बलिदान का समुचित सम्मान पा रहा है?

सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई भी शहीद परिवार खुद को उपेक्षित महसूस न करे और उन्हें वह सम्मान और सहायता मिल सके जिसके वे वास्तव में हकदार हैं।

शहीद संतोष यादव को पूरे देश की ओर से नमन। उनकी वीरता, साहस और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

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