बिहार के सहरसा में एक व्यक्ति पिछले 26 वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ते-लड़ते थक चुका है। प्रशासनिक उदासीनता से परेशान होकर वह अब अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) कार्यालय के पास मौन ध्यान में बैठकर न्याय की गुहार लगा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि उसके मामले में अब तक करीब 40 बार प्रशासनिक आदेश जारी हो चुके हैं, लेकिन हर बार आदेश का पालन नहीं हुआ और मौके पर पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया गया।

 

पीड़ित का कहना है कि वह एक गरीब मजदूर है और अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए दिल्ली और पंजाब में मजदूरी करता है। साल भर बाहर रहकर कमाई करता है और कुछ दिनों के लिए गांव लौटता है, लेकिन हर बार न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते उसकी जमा पूंजी खत्म हो जाती है। इसके बाद उसे फिर रोजी-रोटी के लिए दूसरे प्रदेशों का रुख करना पड़ता है।

 

पीड़ित के मुताबिक इस बार वह 5 फरवरी 2026 को करीब 60 हजार रुपये की व्यवस्था कर सहरसा पहुंचा, ताकि लंबे समय से चल रहे मामले का समाधान हो सके। लेकिन उसके अनुसार समस्या अब भी वैसी ही बनी हुई है जैसी 26 साल पहले थी। उसका आरोप है कि 23 फरवरी 2026 को जारी प्रशासनिक आदेश का भी पालन नहीं किया गया।

 

इसके बाद 2 मार्च 2026 को नोहटा के अंचलाधिकारी द्वारा पुलिस बल की मांग की गई, लेकिन प्रशासन ने होली और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का हवाला देकर कार्रवाई को टाल दिया। इससे पीड़ित और अधिक निराश हो गया।

 

निराश और हताश पीड़ित ने कहा कि अगर उसे जल्द न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर हो सकता है। फिलहाल वह कांग्रेस कार्यालय के बरामदे में, जो SDO कार्यालय से कुछ मीटर की दूरी पर स्थित है, मौन ध्यान में बैठकर प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।

 

यह मामला अब स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इतने लंबे समय से लंबित इस मामले में जल्द ठोस कदम उठाकर पीड़ित को न्याय दिलाया जाए।

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