रिव्यू: बिहार में सरकारी स्केलों को आधुनिकता से लैस करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन बेसिक इन आर्किटेक्चर्स पर काफी अलग नजर आती है। उड़ीसा जिले के रहुई खंड के मल्लिचक गांव में स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है, जहां आज भी बच्चों को भव्यता के उद्घाटन के साथ पढ़ाई का मौका मिल रहा है।
साल 2014 में शुरू हुए इस स्कूल को आज तक अपनी जमीन और भवन तक भाग्य नहीं मिला। यह विद्यालय गांव के महादेव मंदिर के पास एक एकल भवन में चल रहा है। यहां न तो बच्चों के बैठने के लिए बेंच-डेस्क हैं और न ही बच्चों के लिए ठीक से बोर्ड ब्लैक की व्यवस्था है। ऐसी स्थितियाँ हैं कि शिक्षक के हाथ में ब्लैकबोर्ड कैथोलिक बच्चों को शेयरधारकों को मजबूर किया जाता है।
विद्यालय में कुल 102 बच्चों का नामांकन है, जबकि एक प्रधान शिक्षक समेत कुल चार शिक्षक यहां उपकरण हैं। प्रतिदिन करीब 50 से 70 बच्चे स्कूल जाते हैं, लेकिन दर्शन की कमी के कारण वे कभी ठीक हो जाते हैं तो कभी पेड़ के नीचे दरिद्र ग्रहकर पढ़ते हैं। बच्चों के लिए गर्मी या तेज धूप में पढ़ाई करना बेहद मुश्किल होता है।
विद्यालय की प्रधान शिक्षिका प्रीति राज का कहना है कि विद्यालय में शौचालय तक की सुविधा नहीं है. इस वजह से बच्चों को घर पर रखा जाता है, जबकि शिक्षक भी सावे की ओर जाने को मजबूर होते हैं। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार विभाग को पत्र लिखा गया और ‘ई-शिक्षाकोष पोर्टल’ पर भी शिकायत दर्ज करायी गयी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
स्कूल के छात्र भी अपनी रुचि के प्रोफेसर कर्मचारी होते हैं। चौथी कक्षा के छात्र आशिष रंजन और पांचवीं कक्षा के छात्र स्क्रैड राज का कहना है कि स्कूल के पास एक स्कूल भी है, जहां संगीत का खतरा बना रहता है। वे चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द अपने नए स्कूल भवन का निर्माण कराए।
आनंद शंकर ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए भूमि पूजन का प्रस्ताव भेजा गया है। भिन्न भिन्न ही निर्माण कार्य प्रारंभ। वहीं जिला शिक्षा वैल्यूएशन आनंद विक्ट्री ने कहा है कि शंघाई स्कूल को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
