भागलपुर में व्यापारिक और उद्योगिक जगत में खुशी की लहर है। अमेरिकी सरकार द्वारा 25 प्रतिशत टैरिफ हटाने के फैसले पर ट्रंप प्रशासन के हस्ताक्षर के बाद भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील की संभावनाएँ मजबूत हो गई हैं। इस निर्णय से खासकर टेक्सटाइल और आर्टिजन उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भागलपुर के बुनकर से एक्सपोर्टर बने जियाउर्रहमान ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सतत पहल का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बाजार में भागलपुरी टेक्सटाइल की खास पहचान है। वहां के ग्राहक उन्हीं बारीक कारीगरी और गुणवत्ता की तलाश में रहते हैं, जो भागलपुर के कारीगरों के हाथों से तैयार होती है। जियाउर्रहमान ने यह भी जोर देकर कहा कि इस तरह की पारंपरिक कला और गुणवत्ता दुनिया के अन्य किसी हिस्से में उतनी सफल और लुभावनी नहीं पाई जाती।
जियाउर्रहमान का कहना है कि टैरिफ हटने और अंतरिम ट्रेड डील के प्रभाव से भागलपुर के सिल्क उद्योग को नई मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय बुनकरों, कारीगरों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों की आय में निश्चित रूप से वृद्धि होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और युवा पीढ़ी को उद्योग की ओर आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि अमेरिका जैसे बड़े बाजार में शुल्कों में कमी आने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी। इससे भागलपुर के सिल्क और हैंडीक्राफ्ट के निर्यात में वृद्धि होने की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
भागलपुर व्यापार संघ और बुनकर संगठन भी इस फैसले को उद्योग की प्रगति की दिशा में मील का पत्थर मान रहे हैं। बाजार जानकारों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में सिल्क निर्यात के ऑर्डर में बढ़ोतरी के साथ ही स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।
इस प्रकार, अमेरिका द्वारा टैरिफ हटाने का निर्णय न केवल निर्यातकों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि भागलपुर के सिल्क उद्योग के समग्र विकास और क्षेत्रीय आर्थिक उन्नति में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
