पटना: खाड़ी देशों में जारी ईरान-सार्वजनिक तनाव का असर अब आम लोगों तक पहुंच गया है। व्यावसायिक उद्यमों की आपूर्ति से प्रभावित होटलों, ढाबों और मनोवैज्ञानिकों के साथ-साथ धार्मिक उद्यमों की रसोई भी संकट में है। इसी का असर है कि सालों से चल रहे गरीबों और अमीरों के लिए ‘दरिद्र नारायण भोज’ पर भी लिखा है।
महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव ने बताया कि मंदिर की व्यवस्था से व्यवसायिक वास्तुशिल्प आपूर्ति में अचानक कमी लाई गई है। पहले जहां डाइजेस्टों को एक दिन में दो वक्त के भोजन कक्ष में ले जाया गया था, वहीं अब गैस की कमी के कारण इसे एक वक्त के रूप में अस्थायी रूप से दिया गया है।
उन्होंने बताया कि मंदिर में गैस का उपयोग मुख्य रूप से प्रसाद और दरिद्र नारायण भोज के लिए होता है। बौद्धों के लिए उपलब्ध गैस इंजेक्शनों को उपलब्ध कराने के लिए नैवेद्यम प्रसाद के निर्माण में प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि यह प्रसाद बड़ी संख्या में भक्तों के बीच होता है।
गैस संकट से मुक्ति के लिए मंदिर प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था पर भी काम कर रहा है। इसके तहत बड़े पैमाने पर एक्सेल चूल्हे बनाने की योजना बनाई गई है। इस दिशा में गुजरात की एक कंपनी से विशेष रूप से बड़े पैमाने पर इंस्टिट्यूट सेट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें से दो सेट का ऑर्डर दिया गया है, जिसमें एक अयोध्या स्थित राम रसोई और दूसरा पटना के महावीर मंदिर परिसर के लिए होगा।
अयोध्या में राम रसोई में लकड़ी और रसोई के बने चूल्हों पर भोजन किया जा रहा है, जिससे खाना तैयार करने में सबसे ज्यादा समय लग रहा है। इसी वजह से वहां भी थ्री स्पीकर की जगह टू स्पीकर भोजन की व्यवस्था की जा रही है।
मंदिर प्रशासन भविष्य के लिए स्थायी समाधान के रूप में बायो प्लांट लगाने की योजना पर भी काम कर रहा है, ताकि रसोई के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत उपलब्ध हो सके।
यहां आने वाले दिनों में का त्योहार भी करीब रहता है, जब मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसे देखते हुए मंदिर प्रशासन ने जिला प्रशासन से साउदीमी सप्लाई सप्लाई की सुरक्षा की मांग की है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि त्योहार के दौरान प्रसाद निर्माण में कोई बाधा नहीं दी जाएगी।
