नारायणपुर प्रखंड के बलाहा गांव में इन दिनों होली का उत्साह पूरे शबाब पर है। गांव की हर शाम फगुआ और चैती गीतों की मधुर धुन से गुलजार हो रही है। ढोलक की थाप और झाल-मृदंग की संगत के बीच गूंजते पारंपरिक गीत वातावरण में प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का रंग घोल रहे हैं। युवा, किशोर और बुजुर्गों की मिश्रित टोली पूरे उत्साह के साथ टोले-मुहल्लों में घूम-घूमकर फाल्गुन के पारंपरिक गीत प्रस्तुत कर रही है।
गांव की गलियों में जैसे ही शाम ढलती है, लोग अपने-अपने घरों से निकलकर इस सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बन जाते हैं। फगुआ गायकों की टोली ढोल, झाल और अन्य वाद्य यंत्रों के साथ गांव के मंदिरों और प्रमुख स्थानों पर पहुंचकर सामूहिक गायन करती है। गीतों के माध्यम से सामाजिक समरसता, आपसी समन्वय और ग्रामीण एकता का संदेश दिया जा रहा है। इस आयोजन से गांव में पुरानी परंपराएं एक बार फिर जीवंत होती नजर आ रही हैं।
भाजपा नेता सह वार्ड सदस्य चितरंजन सिंह कुशवाहा ने बताया कि बलाहा गांव के वार्ड संख्या सात में विशेष रूप से फाल्गुन के पारंपरिक गीतों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है। वहीं ग्रामीण प्रेम कुमार यादव ने बताया कि पिछले चार-पांच दिनों से फगुआ गायकों की टोली लगातार गांव में भ्रमण कर रही है और लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, इस सामूहिक गायन कार्यक्रम का समापन होली के दिन विशेष आयोजन के साथ किया जाएगा। गांव में बढ़ती रौनक और उमंग यह दर्शा रही है कि परंपरा और संस्कृति की यह धारा आज भी पूरी मजबूती के साथ बह रही है।
