सहरसा जिले के मत्स्यगंधा क्षेत्र स्थित श्री रक्त काली चौसठ योगिनी मंदिर परिसर में एक जनवरी को भक्तिभाव और लोकसंस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। नववर्ष के अवसर पर मंदिर परिसर भगैत की भक्तिमय धुनों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित बाबा कारू खिरहर के स्थान पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर परंपरागत भगैत कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। बाबा कारू खिरहर विकास परिषद एवं अखिल भारतीय भगैत महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह 25वां वार्षिक उत्सव पूरे हर्षोल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। पूरे दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और भक्ति रस में डूबे लोकगीतों ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सह जिला परिषद चेयरमैन सुरेंद्र यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन समारोह में कारू महंथ उपेन्द्र खिरहर, डॉ. गणेश कुमार, डॉ. रामचंद्र यादव, अखिल भारतीय भगैत महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष देव नारायण यादव उर्फ नूनू यादव, अशोक मानव, अशोक यादव, रंजीत पंजीयार, दीपेन्द्र पंजीयार, चंद्र किशोर पंजियार, अजय यादव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के बीच सामूहिक रूप से खीर महाप्रसाद का वितरण किया गया। महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। भगैत महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष देव नारायण यादव ने कहा कि बाबा कारू खिरहर को पशुओं के देवता के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है। वर्षों से पशुपालक यहां श्रद्धा के साथ दूध चढ़ाने आते रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाबा कारू खिरहर को 14 पथों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है और उनकी महिमा पीढ़ियों से लोकआस्था में जीवित है।
दिनभर चले इस आयोजन में भक्ति, श्रद्धा और लोकसंस्कृति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भगैत की धुनों, श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर परिसर की रौनक ने पूरे मत्स्यगंधा क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। यह आयोजन लोकसंस्कृति और परंपराओं को सहेजने की एक सशक्त मिसाल के रूप में सामने आया।
