भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड अंतर्गत एकचारी पंचायत में आगामी 23 जनवरी को आयोजित होने वाली सरस्वती पूजा को लेकर अंतिम चरण की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी कड़ी में मां शारदे क्लब की ओर से बुधवार को देश के चर्चित अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने अपनी अद्भुत और नवाचारी कला का प्रदर्शन कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने मां सरस्वती की दिव्य और भव्य आकृति उकेर कर न सिर्फ श्रद्धा, बल्कि कला के क्षेत्र में भी एक नया प्रयोग प्रस्तुत किया।

 

मधुरेंद्र कुमार, जिन्होंने गंगा नदी की उजली रेत, समुद्र तट की बालू और पीपल के हरे पत्तों पर अपनी अनोखी कलाकारी से दुनिया भर में पहचान बनाई है, इस बार भागलपुर के कहलगांव स्थित एनटीपीसी में बिजली उत्पादन के दौरान निकलने वाली कोयले की छाई को अपनी कला का माध्यम बनाया। उन्होंने लगभग 20 टन (20,000 किलोग्राम) छाई का उपयोग कर करीब 15 फीट ऊंची मां सरस्वती की भव्य आकृति का निर्माण किया है, जो दूर से ही लोगों का ध्यान खींच रही है।

 

इस कलाकृति में मां सरस्वती को वीणा धारण किए हंस की सवारी करते हुए दर्शाया गया है। साथ ही समीप ही मोर की मनोहारी आकृति भी उकेरी गई है, जो रचना को और अधिक जीवंत बनाती है। कलाकृति पर “हैप्पी सरस्वती पूजा” का संदेश भी अंकित किया गया है, जो ज्ञान और उत्सव का भाव प्रकट करता है। कलाकार मधुरेंद्र कुमार ने बताया कि इस रचना के माध्यम से वे ज्ञान, रचनात्मकता और विश्व शांति का संदेश देना चाहते हैं।

 

रेतकला के जादूगर के रूप में विख्यात मधुरेंद्र कुमार प्राकृतिक आपदाओं, समसामयिक घटनाओं और ज्वलंत सामाजिक विषयों पर अपनी कला के जरिए सकारात्मक संदेश देने के लिए देश-विदेश में जाने जाते हैं। अपनी विशिष्ट और नवाचारी कला के बल पर वे अब तक 50 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। वे ऐसे पहले भारतीय कलाकार हैं जिन्हें लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है।

 

एकचारी पंचायत में प्रदर्शित मां शारदे की यह अनोखी कलाकृति सरस्वती पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है, जहां श्रद्धा और कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *