भागलपुर जिले के नवगछिया पुलिस जिला अंतर्गत खरीक प्रखंड से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन के अतिक्रमण-मुक्त अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर राज्य सरकार सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर ही सरकारी पदाधिकारी की कथित मिलीभगत से सरकारी जमीन पर घेराबंदी कराए जाने का आरोप लगाया गया है।
मामला खरीक प्रखंड के तेलघी गांव का है, जहां सड़क किनारे स्थित सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है। तेलघी निवासी वीरेंद्र प्रताप सिंह ने इस संबंध में जिला अधिकारी भागलपुर सहित कई वरीय प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की शिकायत की है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि खाता संख्या 933 और खेसरा संख्या 1877 की करीब 11 डिसमिल सरकारी जमीन पर रात के अंधेरे में मिट्टी, बालू और ईंट गिराकर घेराबंदी की जा रही है।
आरोप है कि यह पूरा अवैध कार्य एक सरकारी पदाधिकारी के संरक्षण में किया जा रहा है, जिसके कारण दबंगों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो दबंग तत्वों ने हथियार लहराकर लोगों को डराने-धमकाने की कोशिश की। इससे गांव में दहशत का माहौल व्याप्त है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उक्त जमीन सार्वजनिक उपयोग की है और सड़क किनारे होने के कारण भविष्य में विकास कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में अगर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हो गया तो आम लोगों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।
वीरेंद्र प्रताप सिंह ने अपने आवेदन में प्रशासन से मांग की है कि सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण और घेराबंदी को तत्काल रोका जाए, दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और मामले में शामिल पदाधिकारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर आरोप पर कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है, या फिर सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के दावे कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।
