भागलपुर: बिहार विधानसभा के बजट सत्र की समाप्ति के बाद पहली बार विधायक बने जनप्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और इसे सीखने व समझने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। नेताओं ने कहा कि सदन की कार्यवाही को नजदीक से देखने और उसमें सक्रिय भागीदारी से विकास के विजन को लेकर नई स्पष्टता मिली है। नए विधायकों ने माना कि यह सत्र उनके राजनीतिक जीवन की दिशा तय करने वाला अनुभव साबित हुआ।
भागलपुर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक रोहित पांडेय ने कहा कि यह उनका पहला बजट सत्र था और इसमें उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। उन्होंने बताया कि सदन में सभी दलों के विधायकों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाया और समाधान के लिए सरकार से आग्रह किया। इससे “विकसित बिहार” की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
रोहित पांडेय ने कहा कि चर्चा केवल अपने-अपने क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे राज्य के विकास को लेकर सामूहिक सोच सामने आई। सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और रोजगार जैसे अहम मुद्दों पर गंभीरता से बहस हुई, जिससे नए विधायकों को कार्य करने का स्पष्ट विजन मिला। उन्होंने कहा कि अनुभवी विधायकों के तर्क, आंकड़ों के साथ प्रस्तुतिकरण और विषयों की गहराई से चर्चा नए जनप्रतिनिधियों के लिए एक तरह की कार्यशाला जैसी रही।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और अन्य संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से जनता की आवाज को प्रभावी ढंग से सदन तक पहुंचाने की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला। विभागीय मंत्रियों से सीधे संवाद ने भी नीतिगत कार्यप्रणाली की बेहतर जानकारी दी।
विधायक ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में वे अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों को प्राथमिकता देंगे और बजट में उपलब्ध प्रावधानों का अधिकतम लाभ क्षेत्र को दिलाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में सभी जनप्रतिनिधि मिलकर काम करेंगे।
कुल मिलाकर, इस बार का बजट सत्र नए विधायकों के लिए सीख, अनुभव और भविष्य की रणनीति तय करने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ, जिससे “विकसित बिहार” के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
