भागलपुर के सबौर प्रखंड स्थित बरारी पंचायत के सेवकनगर ज्योति बिहार कॉलोनी में सिंधी समाज का पहला झूलेलाल मंदिर इन दिनों लोगों के बीच आकर्षण और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। करीब 20 वर्ष पहले इस मंदिर की स्थापना स्वर्गीय सेवक राम और स्वर्गीय हशमत राय नामक दो भाइयों ने अपने निजी खर्च से की थी। तब से लेकर आज तक इस मंदिर की देखरेख, पूजा-पाठ और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी उसी परिवार के सदस्य निभाते आ रहे हैं।

 

समय के साथ मंदिर की महत्ता और सुंदरता दोनों बढ़ी हैं। खास बात यह है कि करीब दो वर्ष पूर्व मंदिर का सौंदर्यकरण और नवीकरण भी इसी सिंधी परिवार द्वारा कराया गया, जिससे मंदिर की भव्यता और भी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी यहां पहुंचकर भगवान झूलेलाल के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं।

 

सिंधी समाज के मुखिया खेमचंद बचियानी के अनुसार, देशभर में बसे सिंधी समाज के लोग इस मंदिर के प्रति विशेष श्रद्धा रखते हैं और जब भी भागलपुर आते हैं, यहां दर्शन जरूर करते हैं। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि सिंधी संस्कृति और परंपरा का भी जीवंत प्रतीक बन चुका है।

 

अगर सिंधी समाज के इतिहास की बात करें, तो यह समुदाय मूल रूप से ऐतिहासिक सिंध प्रांत से जुड़ा हुआ है। भारत विभाजन के बाद यह समाज देश के विभिन्न हिस्सों में आकर बस गया, जिनमें भागलपुर का यह इलाका भी शामिल है। अपनी मेहनत, व्यापारिक कौशल और सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध सिंधी समाज भगवान झूलेलाल में गहरी आस्था रखता है।

 

मंदिर की सेवा में जुड़े परिवार के प्रमुख सदस्यों में स्व हशमत राय, स्व सेवक राम, स्व नंदलाल, पुरुषोत्तम दास, डॉ भगवान दास, मुरलीधर, मनोहरलाल साह सहित कई अन्य सदस्य शामिल हैं। इनके सामूहिक प्रयास से यह मंदिर आज भी आस्था, एकता और परंपरा का संदेश दे रहा है।

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